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आरटीई का विरोध करने वाले राज्य इसमें इच्छुक नहीं: सिब्बल

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने के लिये धन देने में असमर्थता व्यक्त करने वाले राज्यों पर बरसते हुये गुरुवार को कहा कि इस प्रकार का रवैया यह दर्शाता है कि वे सभी बच्चों को शिक्षा सुनिश्चित नहीं करना चाहते.

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केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने के लिये धन देने में असमर्थता व्यक्त करने वाले राज्यों पर बरसते हुये गुरुवार को कहा कि इस प्रकार का रवैया यह दर्शाता है कि वे सभी बच्चों को शिक्षा सुनिश्चित नहीं करना चाहते.

ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर आये सिब्बल ने कहा, ‘यदि राज्य कहते हैं कि वे योगदान करना नहीं चाहते हैं इसका उस राज्य के लोगों में संदेश जायेगा कि वे शिक्षा में रुचि नहीं ले रहे हैं.’ सिब्बल की प्रतिक्रिया ऐसे समय पर आई जब शिक्षा की दृष्टि से अत्यंत पिछड़े हुये दो राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने शिक्षा का अधिकार कानून लागू करने के लिये केंद्र से इसका पूरी तरह वित्तपोषण करने की मांग है. यह कानून एक अप्रैल से लागू हो गया है.

इस कानून के तहत शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार हो गया है और इसे ठीक ढंग से लागू करने के लिये अगले पांच सालों में 1.71 लाख करोड़ रुपये की जरूरत है. उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती और बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने इस कानून को लागू करने के लिये केंद्र से शत प्रतिशत वित्तीय सहायता देने की मांग की है.

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सिब्बल ने कहा कि शिक्षा राज्य सूची का विषय है और राज्यों को बच्चों को शिक्षा देने के लिये और जिम्मेदारी उठानी चाहिये. उन्होंने कहा, ‘यह केंद्र की योजना है जिसके द्वारा हम राष्ट्रीय शिक्षा अभियान का हिस्सा बनने का प्रयास कर रहे हैं. मैं समझता हूं कि राज्यों को यह निर्धारित करना होगा कि उन्हें इस पर क्या करना है.’ गौरतलब है कि इस योजना के लिये आवश्यक धन में मानव संसाधन मंत्रालय 55 प्रतिशत हिस्सा देगा तथा 45 प्रतिशत हिस्सा राज्यों को देना होगा.

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