गुरुवार से पूरे देश में लागू सर्व शिक्षा अभियान कानून की सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मीडिया को निभाना होगा. मीडिया तथा कानून विशेषज्ञों ने यह राय जाहिर की कि केंद्र सरकार ने गुरुवार से लागू सर्व शिक्षा अभियान में छह वर्ष से 14 वर्ष के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रवाधान किया है लेकिन इस अभियान की सफलता में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
पराड़कर भवन में ‘सर्व शिक्षा अभियान में मीडिया की भूमिका’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाने में मीडिया की अहम भूमिका होगी. विशेषज्ञों ने कहा कि लोगों को इस कानून के बारे में जागरूक करने में मीडिया यदि अपनी भूमिका पूरी तरह से निभायेगा तो आम लोगों तक इसके लाभ आसानी से पहुंचाये जा सकते हैं.
गोष्ठी को संबोधित करते हुए काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विधि संकाय के डीन प्रोफेसर डीपी वर्मा ने कहा कि शिक्षा के बिना किसी भी राष्ट्र का संपूर्ण विकास संभव नहीं है. इसलिए किसी भी राष्ट्र को अपने विकास की आधारशिला उचित शिक्षा प्रणाली लागू करके रखनी होगी. उन्होंने कहा कि भारत में लागू वर्तमान शिक्षा प्रणाली की नींव लॉर्ड मैकॉले ने दो फरवरी 1935 में रखी थी जिसका मूल उद्देश्य भारतीय शिक्षा और संस्कृति को नष्ट कर अपने वैश्विक साम्राज्य के लिए बाबुओं की फौज तैयार करना था.
उन्होंने कहा कि मैकाले से लेकर आज तक लगभग उसी शिक्षा नीति का पालन हो रहा है. वरिष्ठ पत्रकार एवं काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता विभाग के निदेशक प्रोफेसर ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने देश में आजादी के बाद दस वर्षों के भीतर कक्षा आठ तक की शिक्षा सभी बच्चों को उपलब्ध कराने की बात कही थी लेकिन देश को आजादी मिले 63 वर्ष हो गये फिर भी यह अभियान आज तक सफल नहीं हो सका.
उन्होंने कहा कि इसका मुख्य कारण सरकार में दृढ इच्छाशक्ति की कमी और भ्रष्ट नौकरशाही है. इसी के कारण इस अभियान के लिए लगातार अवधि और खर्च राशि ही बढ़ती रही लेकिन अभियान सफलता से कोसों दूर रह गया. दैनिक अखबार ‘अमर उजाला’ के स्थानीय संपादक तीर विजय सिंह ने कहा कि सन् 1990 के बाद से पुन: सर्व शिक्षा अभियान सरकार का प्रमुख मुद्दा बना.
सन् 2001 से 2010 तक खरबों रूपये खर्च करके भी इस अभियान के मुख्य उद्देश्य को भारत सरकार हासिल नहीं कर सकी है बल्कि हमेशा की तरह इस लक्ष्य को हासिल करने की अवधि 2017 तक बढ़ा दी गई. अब सरकार के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह इस अभियान को सफल बनाने के लिए नौकरशाही पर लगाम कसे तब जाकर ही इस अभियान को सफलता मिल सकती है.
इस दिशा में मीडिया की भूमिका भी अति महत्वपूर्ण है. यदि मीडिया सर्वशिक्षा अभियान के उद्देश्यों पर नजर रखते हुए सरकारी कार्रवाई की छानबीन करता रहेगा और जनता को उसके अधिकारों के प्रति सजग करने का काम करेगा तो इस अभियान को शीघ्र सफलता मिल सकती है.