जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को हुआ आतंकी हमला हाल के इतिहास में अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक है. गृह मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद होने वाले जवानों की संख्या में 93 फीसदी का इजाफा हुआ है. इसके अलावा इन पांच सालों में जम्मू- कश्मीर में आतंकी घटनाओं में 176 फीसदी का इजाफा हुआ है.
गृह मंत्रालय के मुताबिक साल 2014 के मुताबले साल 2018 में जम्मू-कश्मीर में नागरिकों, सुरक्षा बलों और आतंकवादियों- तीनों की मौतों में इजाफा हुआ है.
2014 से 2018 के बीच नागरिकों की मौत में 35.71 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. जबकि आतंकी हमलों में शहीद होने वाले सुरक्षाबलों की संख्या में 93 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. साल 2014 में जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में 47 जवानों ने जान गंवाई थी. जबकि साल 2018 में 91 जवान शहीद हुए. इस तरह 2014 के मुकाबले 2018 में 44 जवान ज्यादा शहीद हुए. हालांकि, 2014 के मुकाबले 2018 में 133.63 प्रतिशत ज्यादा आतंकी मारे गए थे. 2014 में 110 आतंकी सेना के ऑपरेशन में मार गिराए गए, जबकि 2018 में 257 आतंकियों को ढेर किया गया.
2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में कुल 1315 लोग आतंकवाद की वजह से मारे गए. इसमें 138 (10.49 प्रतिशत) नागरिक थे, 339 (25 प्रतिशत) सुरक्षा बल और 838 (63.72 प्रतिशत) आतंकी थे.
2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में कुल 1708 आतंकी हमले हुए. कहा जा सकता है कि इस हिसाब से हर महीने 28 आतंकी हमले जम्मू-कश्मीर में हुए. भारत सरकार के आंकड़े इन दावों की पुष्टि करते हैं. इन आंकड़ों को गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने लोकसभा में जारी किया था.
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2014 में राज्य में 222 आतंकी घटनाएं हुई थी. 2015 में इसमें मामूली कमी आई और ये आंकड़ा 208 हो गया. लेकिन 2016 के बाद जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमलों में लगातार इजाफा हुआ है. 2016 में जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में 54.8 का इजाफा हुआ, 2017 में 6 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया. इस साल 342 आतंकी हमले हुए. 2018 में इस आंकड़े में 79.53 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया. 2018 में 614 आतंकी हमले हुए. आंकड़ों के मुताबिक साल 2018 में हर महीने 51 आतंकी हमले हुए.