राजस्थान से मध्यप्रदेश के लिये भेजे गये विस्फोटकों से भरे गायब हुए ट्रकों की संख्या 60 से बढ़कर 163 हो जाने से पुलिस महकमें व खुफिया एजेंसियों में हड़कंप मच गया है. पुलिस ने इस मामले में न केवल चार मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर इनाम घोषित किया है बल्कि राजस्थान विस्फोटक निर्माता कंपनी के मुलाजिमों को भी आरोपी बनाने की कवायद शुरू कर दी है.
सागर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने बताया कि विस्फोटकों से लदे 60 ट्रकों के गायब होने की मामले की जांच के लिये प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा, राजस्थान के भीलवाडा और धौलपुर, गुजरात में राजकोट व महाराष्ट्र के अहमदनगर गई टीमों द्वारा जुटाये गये दस्तावेजों व साक्ष्यों से पता चला है कि राजस्थान की धौलपुर स्थित राजस्थान एक्सप्लोसिव एंड केमिकल्स लिमिटेड से जिस प्रकार सागर जिले में गणेश विस्फोटक के नाम 60 ट्रक विस्फोटक भेजे थे.
उन्होंने बताया कि जांच से पता चला है कि अशोकनगर जिले के चंदेरी में स्थित संगम विस्फोटक के नाम भी राजस्थान की विस्फोटक निर्माता कंपनी आईसीएल से विस्फोटकों से लदे 103 ट्रक भेजे गये थे. मगर वे आज तक मंजिल पर नहीं पहुंचे हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में जयकिशन आसवानी के मुनीम राजेन्द्र चौबे के संगम एक्सप्लोसिव का मालिक होने के संकेत मिले हैं. {mospagebreak}
उन्होंने बताया कि इस मामले की सूचना अशोकनगर पुलिस को दे दी गयी है. सिंह ने बताया कि विस्फोटकों से भरे ट्रकों के गायब होने के मामले में पुलिस की अब तक जांच में आठ लोगों को आरोपी बनाया है.
इनमें से चार मुख्य आरोपियों में राजस्थान की भीलवाडा के भोलीग्राम स्थित बीएम ट्रेडर्स व मप्र के राजगढ़ जिले के ब्यावरा में स्थित बीएम ट्रेडर्स के लायसेंसधारक दीपा हेडा, महाराष्ट्र के अहमदनगर स्थित अजय एक्सप्लोसिव के मालिक शिवचरण हेडा, राजस्थान के उदयपुर निवासी विस्फोटक व्यापारी जयकिशन आसवानी और सागर जिले के सडेरी में स्थित गणेश विस्फोटक मैग्जीन के मालिक देवेन्द्र सिंह ठाकुर की गिरफ्तारी पर दस दस हजार रुपये का ईनाम घोषित किये गये हैं.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस मामले की जांच में लगी टीमों को राजस्थान के धौलपुर स्थित विस्फोटक निर्माता कंपनी राजस्थान एक्सप्लोसिव एंड केमिकल्स प्रबंधन द्वारा इस विस्फोटकों की कथित अवैध खरीदी के सिलसिले में जो दस्तावेज व साक्ष्य मिले हैं, उन्हें कंपनी के कर्मचारियों को आरोपी बनाये जाने के लिये पर्याप्त माना जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार, यह सारा मामला विस्फोटक का व्यापार और संग्रह करने के लायसेंस को किराये पर चलाये जाने का है और ऐसा लगता नहीं कि इस गोरखधंधे की भनक विस्फोटक निर्माता कंपनी व विस्फोटक नियंत्रक सरकारी महकमें को नहीं होगी. सूत्रों के अनुसार, सारे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और आरोपियों के पकडे जाने के बाद इस पूरे मामले का खुलासा होने की संभावना है.