खबर है कि अब राजनाथ सिंह बीजेपी के नए अध्यक्ष बनेंगे. खबरों के मुताबिक बीजेपी में राजनाथ सिंह के नाम पर मुहर लग गयी है.
बताया जा रहा है कि गडकरी पर लग रहे आरोपों की वजह से संघ ने अपना हाथ पीछे खींच लिया जिससे उनका अध्यक्ष बनना मुश्किल हो गया है. उसके बाद बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस्तीफा दे दिया. हमारे सहयोगी चैनल आजतक के साथ बातचीत में गडकरी ने कहा कि वे दोबारा बीजेपी के अध्यक्ष नहीं बनेंगे. गडकरी का कहना है कि वो आरोपों से तंग आकर इस्तीफा दे रहे हैं. हालांकि उनका ये भी कहना है कि जांच में वे बेदाग साबित होंगे और वापसी करेंगे.
खबरों के मुताबिक बुधवार सुबह बीजेपी संसदीय दल की बैठक होगी जिसमें राजनाथ सिंह के नाम पर औपचारिक मुहर लगा दी जाएगी. बुधवार सुबह साढ़े नौ (9.30) बजे बीजेपी पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक होगी, जिसमें राजनाथ के नाम पर औपचारिक मुहर लगेगी. पार्लियामेंट्री बोर्ड की मीटिंग के बाद ही राजनाथ अध्यक्ष पद के चुनाव का पर्चा भरेंगे.
गौरतलब है कि बीजेपी के बड़े नेता मंगलवार दिन भर आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे थे. मुंबई में लालकृष्ण आडवाणी, नितिन गडकरी और संघ के नेता भैय्या जी जोशी एक मंच पर दिखे. उनमें कुछ बात भी हुई, लेकिन आडवाणी का मूड उखड़ा-उखड़ा रहा. रात 8 बजे दिल्ली में बीजेपी नेताओं की बैठक हुई, जिसमें राजनाथ के नाम पर सहमति बनी.
राजनाथ सिंह पहले भी चार सालों तक बीजेपी के अध्यक्ष रह चुके हैं. दिसंबर 2005 में उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी के इस्तीफे के बाद पार्टी की कमान संभाली थी. 2009 का आम चुनाव बीजेपी ने राजनाथ के नेतृत्व में ही लड़ा था. लेकिन आम चुनाव में UPA के हाथों NDA की हार के बाद राजनाथ की जगह नितिन गडकरी को बीजेपी अध्यक्ष बना दिया गया था. यूपी के मुख्यमंत्री रह चुके राजनाथ फिलहाल गाजियाबाद के सांसद हैं.
उधर बीजेपी नेता और पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा है कि वो अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ेंगे. यशवंत सिन्हा ने मंगलवार दिन में अध्यक्ष पद के लिए होने वाले चुनाव का नॉमिनेशन फॉर्म मंगवाया था. नॉमिनेशन फॉर्म लेने के लिए उन्होंने पार्टी का फुलटाइम कार्यकर्ता होने का सबूत भी पेश किया था. यशवंत सिन्हा के इस कदम से यह साफ हो गया था कि गडकरी के नाम पर बीजेपी में आम सहमति नहीं है.
गौरतलब है कि गडकरी के इरादों पर पहला वज्रपात राम जेठमलानी के बेटे ने किया था. महेश जेठमलानी पहले भी गडकरी को भ्रष्टाचार पर आड़े हाथों ले चुके थे. उन्होंने सीधे पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल उठाया और कहा उन्हें भी अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र चाहिए लेकिन मिल नहीं रहे है.