दो तिहाई आबादी के प्रति दिन एक डॉलर से भी कम आय में जीवनयापन करने के बावजूद नाइजीरिया भारत के बाद दुनिया दूसरा सबसे बड़ा फिल्म उद्योग है. यहां की फिल्मों में प्यार, सम्मान, परिवार, एक्शन और भूत प्रेतों के कथानक को आधार बनाया जाता है.
नाइजीरिया का फिल्म उद्योग नॉलीवुड कहलाता है. अफ्रीका और इससे बाहर तक फैले इस उद्योग को यूनेस्को ने निर्मित होने वाली फिल्मों की संख्या के आधार पर बॉलीवुड के बाद विश्व में दूसरा स्थान दिया है. जर्मन पत्रिका डेर स्पीजेल की एक खबर के अनुसार, इस साल नाइजीरिया में कम से कम 900 फिल्में बनाई जाएंगी. यह संख्या हॉलीवुड में निर्माणाधीन फिल्मों की तुलना में दोगुनी है.
नॉलीवुड देश में 20 करोड़ डालर का कारोबार करता है जहां की 70 फीसदी आबादी अब भी प्रति दिन एक डॉलर से भी कम पर गुजर करती है. अगर यहां दिन में केवल दो घंटे के लिए भी बिजली मिल जाए तो लोग खुद को भाग्यशाली समझते हैं. गंदगी का आलम यह है कि सड़कों पर नालियों का पानी बहता रहता है.
देश में नॉलीवुड तेल उद्योग के बाद सबसे बड़ा नियोक्ता है. इसके अपने सितारे हैं और अपने आयोजन होते हैं. इसके पास ऑस्कर का अपना संस्करण ‘‘द अफ्रीकन मूवी एकेडमी अवार्ड्स’’ है. पत्रिका के अनुसार, यहां के डीलर्स की दुकानों पर डीवीडी और वीसीडी के रूप में हजारों ‘‘होम वीडियो’’ हैं. टीवी चैनलों पर फिल्में प्रसारित होती हैं. हॉलीवुड की फिल्मों की नॉलीवुड में कोई भूमिका नहीं है.
नॉलीवुड की सफलता 1992 में ‘‘लिविंग इन बॉन्डेज’’ से शुरू हुई. इस फिल्म में बताया गया था कि एक व्यक्ति एक धार्मिक समुदाय, धन और काले जादू के चक्कर में पड़ कर किस तरह उलझता जाता है. यह फिल्म लोगों को बहुत पसंद आई.
निर्माता अपनी फिल्मों को महंगे सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने के बजाय कथित होम वीडियो में वितरित कर देते हैं जिससे उन्हें पूरी तरह नया बाजार मिल जाता है. वर्ष 1999 में सैन्य तानाशाही समाप्त होने के बाद नॉलीवुड ने अफ्रीकी बाजार में एक साल में 2000 से अधिक फिल्में दीं. इसी के साथ ही लागोस का सुरूलेयर जिला इसका रचनात्मक केंद्र बन गया.