नरेंद्र मोदी सरकार में सेना की ताकत में तेजी से इजाफा हो रहा है. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती 50 दिनों के अंदर भारतीय सेना ने 8500 करोड़ रुपये के कई हथियार खरीदे हैं. सरकारी सूत्रों की माने तो सेना को अपग्रेड करने के लिए कई रक्षा सौदे पाइपलाइन में हैं, जो जल्दी ही होंगे.
दरअसल, बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद सेना को कई अत्याधुनिक हथियारों की जरूरत थी. पुलवामा आतंकी हमले के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने सेना को सीमाओं की सुरक्षा के लिए जरूरी हथियार खरीदने का आपातकालीन अधिकार दिया था. इसके बाद सेना ने एक के बाद एक कई रक्षा सौदे किए.
सेना ने 50 दिनों में जिन अहम रक्षा सौदों को किया है, उसमें स्पाइक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल, आर -73 और आर -77 एअर टू एअर मिसाइलें, स्पाइस 2000 एयर टू ग्राउंड स्टैंडऑफ हथियारों के साथ एक्सेलिबुर गाइडेड गोला-बारूद शामिल है.
सेना के सूत्रों के मुताबिक, बीते दिनों रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी. इस बैठक में सेना को अपग्रेड करने के लिए तेजी से कदम उठाने के लिए कहा गया था. इसके बाद तेजी से रक्षा सौदे किए जा रहे हैं. भविष्य में कई और रक्षा सौदे किए जा सकते हैं.
114 मल्टीरोल लड़ाकू विमान खरीदने की भी योजना
इसके अलावा मोदी सरकार, भारतीय वायुसेना के लिए 114 मल्टीरोल लड़ाकू विमान खरीदने पर भी विचार कर रहा है. करीब 15 बिलियन डॉलर के इस रक्षा सौदे के लिए अमेरिका की बोइंग और लॉकहीड मार्टिन, स्वीडन के साब, फ्रांस की दसॉल्ट सहित कई वैश्विक रक्षा कंपनियां ने दावेदारी की है.
दरअसल, भारतीय वायुसेना में मिग-21 विमान पुराना हो चुका है. मिग-21 कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है. 'फ्लाइंग कॉफिन' बन चुके मिग-21 को बदलने के लिए 114 मल्टीरोल लड़ाकू विमानों को खरीदने की योजना है.