मिजोरम की राज्यपाल कमला बेनीवाल की बर्खास्तगी पर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. विपक्षी पार्टियां जहां इसे बदले की राजनीति बता रही हैं वहीं सरकार का कहना है कि उन्हें संविधान के दायरे में रहते हुए हटाया गया है. सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा, ‘बेनीवाल की बर्खास्तगी संविधान के अनुरूप हुई है.' कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कहा, ‘संविधान के नियमों के अनुरूप हुआ है. महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने इसकी अनुमति दी है.’
उधर कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने सवाल उठाया है कि अगर उन्हें हटाना ही था तो मिजोरम क्यों भेजा गया? कांग्रेस के ही राजीव शुक्ला ने कहा, ‘बीजेपी ने राजनीतिक बदला लिया है. यह सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लंघन है.’
समाजवादी पार्टी ने इसे बदले की राजनीति करार दिया है. तो बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने कहा, ‘हम इसका विरोध करते हैं. यह सही तरीका नहीं है.’
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने इसे राजनीतिक दुराग्रह से प्रभावित निर्णय बताया है. साथ ही उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अवहेलना भी बताया.
गौरतलब है कि कमला बेनीवाल को उनके कार्यकाल की समाप्ति से महज दो महीने पहले बर्खास्त कर दिया गया. गुजरात के राज्यपाल के रूप में उनके और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच रिश्ते कड़वाहट भरे थे. इन दोनों के बीच लोकायुक्त की नियुक्ति और कुछ अन्य विधेयकों को लेकर टकराव हुआ था.
मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहले तो बेनीवाल को गुजरात से मिजोरम भेजा गया और एजल पहुंचने के महज एक महीने बाद ही उन्हें बर्खास्त भी कर दिया गया.
राष्ट्रपति भवन ने बुधवार की रात को बेनीवाल को हटाने की सूचना सार्वजनिक की. सूचना के अनुसार, स्थाई व्यवस्था होने तक मणिपुर के राज्यपाल वी. के. दुग्गल को मिजोरम के राज्यपाल का प्रभार सौंपा गया है. बर्खास्तगी के आदेश के साथ ही राजस्थान से आने वाली 87 वर्षीय कांग्रेस नेता का राज्यपाल के रूप में कार्यकाल समाप्त हो गया है.
मोदी Vs बेनीवाल
गुजरात के राज्यपाल के रूप में मोदी से तनातनी के बीच बेनीवाल ने न्यायमूर्ति आर. ए. मेहता (अवकाश प्राप्त) को गुजरात का लोकायुक्त नियुक्त किया जिसके खिलाफ राज्य ने पहले हाई कोर्ट में फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील की. कोर्ट ने इसे बरकरार रखा. हालांकि जस्टिस मेहता ने पद स्वीकार नहीं किया था और मोदी सरकार ने नया नाम तय किया था.
इसके अलावा कमला बेनीवाल ने राज्य विधानसभा में पारित विभिन्न विधेयकों को भी रोक दिया था. उनमें से एक स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने के संबंध में था. बेनीवाल को पहले अक्टूबर 2009 में त्रिपुरा का राज्यपाल नियुक्त किया गया. वह पूर्वोत्तर राज्यों में पहली महिला राज्यपाल थीं. हालांकि एक महीने बाद ही उन्हें गुजरात का राज्यपाल बना दिया गया था. पुडुचेरी के उपराज्यपाल वीरेन्द्र कटारिया को हटाए जाने के बाद बेनीवाल बर्खास्त की जाने वाली दूसरी राज्यपाल हैं.
मोदी सरकार बनते ही राज्यपालों से इस्तीफा देने को कहा गया था, हालांकि उनमें से कुछ ने इस्तीफा दिया और कुछ अभी भी सरकार में बने हुए हैं. दिलचस्प बात यह है कि यूपीए सरकार द्वारा नियुक्त अन्य कांग्रेस नेता मार्ग्रेट अल्वा को राजस्थान की राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने का अवसर दिया गया.