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वायु प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति, अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने सुझाए 13 उपाय

अगर इन 13 उपायों पर अमल किया जाए तो प्रदूषण को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है और साथ ही हर साल प्रदूषण से होने वाली 9 लाख मौतों को भी रोका जा सकता है. ये 13 उपाय सर्दियों में दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में PM 2.5 को 50 से 60 फीसदी तक कम रखने में सक्षम हैं.

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क्या बढ़ते प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति?
क्या बढ़ते प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति?

देश में बढ़ता प्रदूषण लोगों की चिंता का कारण बनता जा रहा है. खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में हर दिन बढ़ती प्रदूषण की मात्रा खतरे की घंटी बजा रही है. बढ़ते प्रदूषण के चलते कई लोग सांस संबंधित गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं और अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकारों ने समय- समय पर कदम तो उठाये, लेकिन वो बहुत ज्यादा कारगार साबित नहीं हुए. इसी कड़ी में अमेरिका की लुसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी ने एक महत्वपूर्ण शोध किया है, जिसमें ग्रीन पीस ने भी भागीदारी निभाई है.

इस शोध के अंतर्गत 13 उपायों के बारे में जानकारी दी गई है, जिन पर अगर पूरी ईमानदारी से काम किया जाए तो में बहुत हद तक कामयाबी मिल सकती है. इन 13 उपायों में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और आम आदमी की भूमिका जरूरी है.

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अगर इन 13 उपायों पर अमल कर इन पर काम किया जाए तो प्रदूषण को 40 फीसदी तक कम किया जा सकता है और साथ ही हर साल प्रदूषण से होने वाली 9 लाख मौतों को भी रोका जा सकता है. ये 13 उपाय सर्दियों में दिल्ली सहित पूरे उत्तर भारत में PM 2.5 को 50 से 60 फीसदी तक कम रखने में सक्षम हैं.

इस शोध में जारी की गई रिपोर्ट में प्रदूषण के कारणों को समझकर उसके निराकरण के लिए उठाए जाने वाले जरूरी कदम को विस्तार से समझाया गया है, जिसमें शामिल है:-

- थर्मल पावर प्लांट (चालू, निर्माणाधीन और नए पावर प्लांट) से निकलने वाले उत्सर्जन को लेकर कठोर मानक बनाए जाने चाहिए.

- मन्युफैक्चरिंग उद्योग के लिए भी सख्त मानक होने चाहिए और मानकों पर खरा न उतरने पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए.

- ईंट भट्टी में जिग जैक प्रक्रिया का इस्तेमाल

- घरों में इस्तेमाल होने वाले ठोस ईंधन को बदलना

- परिवहन पर सबसे ज्यादा जोर देना और गाड़ियों से निकलने वाले धुंए को रेगुलेट करना

- पराली को जलाने का विकल्प

- कचरा जलाने के विकल्प

- भवन निर्माण के समय कठोर मानकों का पालन

- डीजल जेनेरेटर के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक

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अगर इन सभी क्षेत्रों में सरकार और आम आदमी सहयोग करे तो प्रदूषण में कमी की जा सकेगी.

ग्रीनपीस के सीनियर कैम्पेनर सुनील दहिया ने कहा, 'हम पहली बार विस्तृत और व्यवहारिक नीतियों को सामने रख रहे हैं, जिससे सर्दियों में उत्तर भारत के वायु प्रदूषण को घटाकर लगभग आधा किया जा सकता है. हम से गुजारिश करते हैं कि वह इन उपायों को स्वच्छ वायु के लिए तैयार हो रहे राष्ट्रीय कार्य योजना में शामिल करें और पावर प्लांट के लिए दिसंबर 15 में अधिसूचित उत्सर्जन मानकों का कठोरता से पालन करे, साथ ही अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कठोर मानकों को लागू करके प्रदूषण नियंत्रित करें.'

सुनील आगे कहते हैं कि लुसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी के शोध ने एक बार फिर वही बातें दोहराई हैं, जिनकी मांग देश लंबे अर्से से करता रहा है, जिसमें थर्मल पावर प्लांट और उद्योगों के लिए कठोर उत्सर्जन मानक बनाए जाने शामिल हैं.

इस रिपोर्ट में शामिल नीतियों के विश्लेषण से भारत के स्वच्छ वायु आंदोलन को एक बड़ी मदद मिलेगी. अगर पर्यावरण मंत्रालय लोगों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है तो उसे जल्द से जल्द राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम में क्लीन एयर के सुझाव के साथ-साथ लुसियाना स्टेट यूनिवर्सिटी द्वारा इस रिपोर्ट में शामिल 13 उपायों को भी शामिल करना चाहिए जिससे भारत की हवा को साफ बनाया जा सके.

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