लेफ्ट और कांग्रेस समर्थित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियन ने 8 जनवरी को देशभर में आम हड़ताल का ऐलान किया है. ये फैसला सोमवार को अखिल भारतीय सम्मेलन में लिया गया. ट्रेड यूनियन मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों का विरोध कर रही है. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने बंद के इस आह्वान का समर्थन नहीं किया है.
देशभर में बंद का आह्वान
10 अहम केंद्रीय ट्रेड यूनियन के नेशनल प्लेटफॉर्म ने 8 जनवरी को देशभर में बंद का आह्वान किया है. इस प्लेटफॉर्म के मुताबिक मोदी सरकार की श्रमिक विरोधी आर्थिक नीतियों के खिलाफ बंद बुलाया गया है. ये फैसला जिस सम्मेलन में लिया गया उनमें INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, UTUC और LPF के यूनियन नेताओं ने शिरकत की.
CITU के महासचिव तपन सेन इंडिया टुडे टीवी से कहा, ‘एफडीआई (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) की आड़ में सरकार पब्लिक सेक्टर की खुली लूट को इजाज़त दे रही है, अभी तक मोदी सरकार बेचने के लिये 10 कंपनियों की फेहरिस्त जारी कर चुकी है लेकिन 1 को भी बेचने में कामयाब नहीं हुई.’
श्रमिक विरोधी नीतियों के लिए विपक्ष जिम्मेदार
तपन सेन ने कहा कि श्रमिक विरोधी नीतियों के लिए विपक्षी पार्टियां जिम्मेदार हैं जिन्होंने संसद में मोदी सरकार की श्रम नीतियों को मौन स्वीकृति दी.
श्रमिकों के राष्ट्रीय खुले जन सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने आरोप लगाया कि मोदी-2 सरकार आम लोगों, खास तौर पर श्रमजीवियों के अधिकारों और आजीविका पर आक्रामक हमले कर रही है. अंधाधुंध निजीकरण और CPSEs में 100 फीसदी एफडीआई मौजूदा आर्थिक झमेले के लिए ज़िम्मेदार है.