आज के ही दिन यानी 31 अक्टूबर को साल 1984 में भारत की लौह महिला कहलाने वाली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी. लेकिन ऐसे संकेत मिलते हैं जिससे ऐसा लगता है कि उनको अपनी ऐसी मौत का पूर्वाभास हो गया था. उन्होंने अपनी हत्या से एक दिन पहले अपने अंतिम भाषण में कहा था कि उनके खून का एक-एक कतरा देश के काम आएगा.
इंदिरा गांधी को लेकर सिखों के एक वर्ग में नाराजगी तब से ही पनपने लगी थी, जब उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार का आदेश दिया था. 5 जून 1984 को शुरू हुए इस ऑपरेशन के तहत सेना ने सिखों के पवित्र तीर्थ स्वर्ण मंदिर पर कार्रवाई कर खालिस्तानी आतंकियों का सफाया किया था और इसके बाद से ही पंजाब में आतंकवाद की कमर टूट गई थी.
भुवनेश्वर के परेड ग्राउंड में 30 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की एक चुनावी सभा थी. इस दिन दोपहर को इंदिरा गांधी ने जो चुनावी भाषण दिया था, वह उनके सूचना सलाहकार एच वाई शारदा प्रसाद ने तैयार किया था. लेकिन भाषण के बीच में ही उन्होंने लिखा हुआ भाषण पढ़ने के बजाए दूसरी बातें बोलना शुरू कर दी थीं.
इंदिरा ने कहा था, 'मैं आज यहां हूं. कल शायद यहां न रहूं. मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं. देश की चिंता करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. मेरा लंबा जीवन रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है. मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब मैं मरूंगी तो मेरे ख़ून का एक-एक क़तरा भारत को मजबूत करने में लगेगा.' उनके इस भाषण से लोग चकित रह गए थे, खुद उनकी ही पार्टी के लोग इसे लेकर असमंजस में थे कि आखिर इंदिराजी ने ऐसे शब्द क्यों कहे थे. 31 अक्टूबर 1984 को उनके दो बॉडीगॉर्ड सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने अपने सर्विस वेपन्स से उन्हें गोली मार दी थी, जिसके बाद कुछ ही क्षणों में उनकी मौत हो गई थी.