सेना में गोला बारूद की कमी को दूर करने और टैंक रेजिमेंट को पर्याप्त ताकत देने के लिए इंडियन आर्मी जल्द ही टैंक भेदी बम की खरीदारी कर सकती है. सेना ने T-90 और T-72 टैंक के लिए करीब एक लाख स्पेशलाइज बम खरीदने का प्रस्ताव रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने रखा है. इस खरीद के बाद सेना की ताकत में इजाफा होगा. साथ ही भारत 10 दिन से बड़ी लड़ाई लड़ने में भी सक्षम होगा.
सेना की ओर से ये प्रस्ताव एक हाई लेवल मीटिंग में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के सामने रखा गया. सेना के द्वारा फिन स्टेबिलाइज्ड आर्मर पियर्सिंग डिस्कार्डिंग सैबो (एफएसएपीडीएस) गोला बारूद खरीदने का प्रस्ताव रखा गया है. ये बम T-90 और T-72 टैंक के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इससे दुश्मन के टैंक को भी ध्वस्त किया जा जा सकता है. ये गोला बारूद टैंक के लिए बेहद जरूरी है. खास कर टैंक से टैंक की लड़ाई में इसकी खास जरूरत पड़ती है.
1 लाख टैंक भेदी बम की डिमांड
बता दें, इससे पहले इस बम को भारत में ही बनाने के प्रयास भी किए गए, लेकिन ये प्रोजेक्ट कुछ खास प्रगति नहीं कर सका. सेना को अगर 1 लाख टैंक भेदी बम जल्द मिल जाते हैं तो इससे हमारी सेना के पास जरूरी गोला बारूद का स्टॉक भी मेंटेन हो जाएगा. इस स्टॉक से हमारी सेना 10 दिन की बड़ी लड़ाई लड़ने के लिए तैयार रहेगी.
सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से ही भारत सेना के लिए जरूरी साजो-सामान को दुरुस्त करने में जुटा है. इसी कड़ी में नेवी और वायु सेना ने उनके द्वारा प्रयोग किए जाने वाले गोला बारूद को लेकर बड़ी मात्रा में विदेशी देश के साथ कांट्रैक्ट भी किए हैं. इसमें रूस के की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल भी शामिल है.
वीके सिंह ने भी लिखा था लेटर
सेना में गोला बारूद की कमी की बात सबसे पहले तत्कालीन जनरल वीके सिंह ने एक टॉप सीक्रेट लेटर तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भजी थी. वीके सिंह ने अपने लेटर में इस बात का जिक्र किया था कि सेना के पास सिर्फ तीन दिन का गोला बारूद बचा है. इसके बाद सेना की ओर से भी डिफेंस की स्टैंडिंग कमिटी को गोला बारूद की कमी की स्थिति से वाकिफ कराया गया था.