भारत और ब्रिटेन अब आपस में आपराधिक रिकॉर्ड आसानी से साझा कर सकेंगे. यहां तक की अवैध रूप से ब्रिटेन में रह रहे भारतीयों को अब वापस लाने में भी कोई खास दिक्कत नहीं होगी. ब्रिटेन और भारत के बीच एक करार पर हस्ताक्षर किया गया है, जिसकी मदद से अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर अपराध से निपटना आसान होगा और गैर-कानूनी रूप से ब्रिटेन में रह रहे लोगों को भारत वापस लाया जा सकेगा.
दोनों देश के पीएम लगाएंगे अंतिम मुहर
ब्रिटेन दौरे पर पहुंचे भारत के गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू और ब्रिटेन की मंत्री कैरोलिन नोकस ने इस डील पर हस्ताक्षर किए. इस डील के तहत आपराधिक रिकॉर्ड साझा करने और ब्रिटेन में गैर कानूनी रूप से रह रहे भारतीयों की वापसी का समझौता शामिल है. गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि हालांकि दोनों देशों के बीच दो समझौते हुए हैं, लेकिन इस डील पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे द्वारा ही मुहर लगाई जाएगी.
भारत-ब्रिटेन के बीच बढ़ता सहयोग
भारत और ब्रिटेन के बीच पहले से ही 1992 में एक प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो नवंबर 1993 से लागू है. लेकिन ये इस नए समझौते में ब्रिटेन में रह रहे अवैध प्रवासियों का मुद्दा शामिल है. ब्रिटिश सरकार के मुताबिक ये नया सौदा दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग को प्रतिबिंबित करेगा.
पुलिस को मिलेगी खुफिया जानकारी
ब्रिटिश सरकार के बयान में कहा गया है कि आपराधिक रिकॉर्डों पर हुए इस समझौते से ब्रिटिश और भारतीय कानून प्रवर्तन निकायों के बीच आपराधिक रिकॉर्ड, फिंगरप्रिंट्स और खुफिया जानकारी साझा की जाएगी. इससे पुलिस को अपराधियों से जनता की रक्षा करने में सहायता मिलेगी और कुछ मामलों में दोनों देशों के न्यायालयों का भी काम आसान हो जाएगा.