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भारत की सियाचिन में ट्रैकिंग की योजना, पाक खफा

पाकिस्तान के कड़े विरोध के बावजूद भारत इस वर्ष लगातार चौथी बार अक्तूबर-नवंबर में सियाचिन ग्लेशियर के लिए नागरिक पर्वतारोहण और ट्रैकिंग अभियान की योजना बना रहा है.

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पाकिस्तान के कड़े विरोध के बावजूद भारत इस वर्ष लगातार चौथी बार अक्तूबर-नवंबर में सियाचिन ग्लेशियर के लिए नागरिक पर्वतारोहण और ट्रैकिंग अभियान की योजना बना रहा है.

योजना में शामिल एक सैन्य अधिकारी ने बताया, ‘‘इस वर्ष का सियाचिन ट्रैकिंग अभियान अभी योजना बनाने के स्तर पर है. संभावना है कि इसे अक्तूबर-नवंबर में अंजाम दिया जाए.’’ यह अभियान अब एक सालाना आयोजन बन चुका है. इसका मतलब वैश्विक समुदाय को यह दिखाना है कि सियाचिन की चोटियों पर भारत के सुरक्षा बलों का वर्चस्व कायम है और पाकिस्तान ग्लेशियर के आस-पास भी कहीं नहीं है. सियाचिन को विश्व का सबसे उंचा युद्ध का मैदान माना जाता है.

लगभग 18,875 फीट की उंचाई पर करीब 78 किमी की लंबाई में फैले सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर 25 नवंबर, 2004 तक बंदूकें तनीं हुईं थीं, लेकिन इसके बाद भारत-पाकिस्तान सीमा की 740 किमी लंबी नियंत्रण रेखा और 110 किमी वास्तविक मैदान स्थिति रेखा (एजीपीएल) पर औपचारिक संघषर्विराम समझौता हो गया.

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इस वर्ष के अभियान में सेना की योजना 35 नागरिकों को ले जाने की है, जिनमें महिलाएं, पत्रकार, डीआरडीओ के वैज्ञानिक और ग्लेशियर पर अध्ययन करने वाले संस्थानों के वैज्ञानिक शामिल होंगे. अभियान में सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों के कई पर्वतारोहियों को भी शामिल किया जाएगा.

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