ईरानी युद्धपोत को लेकर भारत का नाम सामने आने के बाद सरकार ने स्थिति साफ कर दी है. सरकार के शीर्ष सूत्रों ने शुक्रवार को उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि भारतीय नौसेना ने अमेरिका को ईरानी युद्धपोत के बारे में खुफिया जानकारी दी थी.
सूत्रों ने इन आरोपों को बेबुनियाद और हास्यास्पद बताया है. उनका कहना है कि इस तरह की किसी भी जानकारी को अमेरिका के साथ साझा करने का सवाल ही नहीं उठता. दरअसल दो दिन पहले अमेरिकी सेना की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया था. इस घटना के बाद कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि इस कार्रवाई में भारतीय नौसेना की ओर से दी गई खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया गया था.
अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबोया था ईरानी युद्धपोत
सरकारी सूत्रों ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारत की ओर से अमेरिका को इस मामले में कोई भी इनपुट नहीं दिया गया था और यह आरोप पूरी तरह निराधार हैं. जिस ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया गया, उसका नाम आईआरआईएस डेना बताया जा रहा है. यह जहाज भारत में आयोजित मिलन बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद अपने देश लौट रहा था.
बताया गया है कि बुधवार को श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी ने इस युद्धपोत को निशाना बनाया. इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की मौत हो गई. इस घटना के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. यह हमला फारस की खाड़ी के बाहर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की बड़ी घटना माना जा रहा है.
हमले में कम से कम 87 ईरानी नाविकों की हुई थी मौत
फिलहाल भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि इस पूरे मामले में भारतीय नौसेना की किसी भी तरह की भूमिका नहीं है और लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं.