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1975 की वो घटना, जब गलवान से पहले आखिरी बार भारत-चीन सीमा पर हुई थी शहादत

1975 में अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में असम राइफल्स के जवानों की पेट्रोलिंग टीम पर अटैक किया गया था. इस हमले में चार भारतीय जवान शहीद हो गए.

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अरुणाचल प्रदेश में हुई थी भारत के जवानों की मौत (फोटो-PTI)
अरुणाचल प्रदेश में हुई थी भारत के जवानों की मौत (फोटो-PTI)

  • लद्दाख में भारत-चीन के बीच विवाद
  • 45 साल बाद सीमा पर हुई शहादत
  • 1975 में अरुणाचल में हुई थी शहादत

चीन के साथ जब भी भारत के युद्ध की बात की जाती है तो 1962 और 1967 को सबसे ज्यादा याद किया जाता है. 1962 में भारत की शिकस्त और 1967 में चीन को सबक सिखाने की गाथा का हर कोई जिक्र करता है. लेकिन इन दोनों युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर एक घटना ऐसी भी हुई थी, जिसके बाद अब लद्दाख की गलवान घाटी में जवानों की शहादत हुई है.

गलवान घाटी में शांति की बातचीत के बीच चीनी सेना से संघर्ष में भारत के तीन जवान शहीद हो गए हैं. 45 साल बाद एलएसी पर जवानों की शहादत हुई है.

ये घटना 1975 में हुई थी. अरुणाचल प्रदेश के तुलुंग ला में असम राइफल्स के जवानों की पेट्रोलिंग टीम पर अटैक किया गया. इस हमले में चार भारतीय जवान शहीद हो गए.

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इस घटना पर भारत सरकार की तरफ से कहा गया कि 20 अक्टूबर 1975 को चीन ने LAC क्रॉस कर भारतीय सेना पर हमला किया. हालांकि, चीन ने भारत के इस दावे को नकार दिया. चीन की तरफ से कहा गया की भारतीय सैनिकों ने एलएसी क्रॉस कर चीनी पोस्ट पर हमला किया और पूरी घटना को जवाब कार्रवाई करार दिया.

बहरहाल, ये विवाद भी सुलझ गया और तब से लेकर अब तक एलएसी पर भारत और चीन के बॉर्डर पर कोई शहादत नहीं हुई है. दोनों सेनाओं के बीच खूब खींचतान होती है. हाथा-पाई तक हो जाती है, लेकिन कभी गोली नहीं चली है. गोली इस बार गलवान घाटी में भी नहीं चली है, लेकिन हिंसा इतनी ज्यादा हुई है कि भारत के एक अफसर समेत तीन जवान शहीद हो गए हैं. जबकि चीन की तरफ से पांच जवानों की मौत हुई है. चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी की है, उन्होंने लोहे की नाल, कीलें और लठ से भारत के सैनिकों पर हमला किया.

भारत-चीन के बीच युद्ध

1962 में चीन से मिली शिकस्त की टीस आज भी भारतीयों के दिल में बरकरार है, पर इतिहास इसका भी गवाह है कि इस घटना के पांच साल बाद 1967 में हमारे जांबाज सैनिकों ने चीन को जो सबक सिखाया था, उसे वह कभी नहीं भुला पायेगा. 1967 को ऐसे साल के तौर पर याद किया जाता रहेगा जब हमारे सैनिकों ने चीनी दुस्साहस का मुंहतोड़ जवाब देते हुए सैकड़ों चीनी सैनिकों को न सिर्फ मार गिराया था, बल्कि उनके कई बंकरों को ध्वस्त कर दिया था. रणनीतिक स्थिति वाले नाथु ला दर्रे में हुई उस भिड़ंत की कहानी हमारे सैनिकों की जांबाजी की मिसाल है.

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