तमिलनाडु में हिंदी भाषा को लेकर सियासी कोहराम छिड़ा हुआ है. ये विवाद तब पैदा हुआ जब शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर बने ड्राफ्ट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट देश के नए मानव संसाधन मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक को सौंपी. इस ड्राफ्ट में कथित तौर पर गैर हिंदी भाषी राज्यों में स्कूली बच्चों को हिन्दी पढ़ाने की सिफारिश की गई है. तमिलनाडु के राजनीतिक दल ऐसे किसी भी प्रस्ताव का जबर्दस्त विरोध कर रहे हैं.
डीएमके अध्यक्ष स्टालिन ने यहां तक कह दिया कि तमिलों के खून में हिन्दी है ही नहीं. विवाद बढ़ता देख केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सफाई दी है. उन्होंने कहा है कि सरकार किसी भी व्यक्ति या राज्य पर कोई भाषा नहीं थोपेगी.
केंद्रीय मंत्री निशंक के मुताबिक स्कूलों में तीन-भाषा प्रणाली के प्रस्ताव पर समिति ने अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी है, अभी यह नीति नहीं है. इस पर लोगों की प्रतिक्रिया मांगी जाएगी. उन्होंने कहा कि यह गलतफहमी है कि यह एक नीति बन गई है.
इससे पहले इस मामले में सूचना-प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी सफाई दी और कहा, 'किसी के ऊपर कोई भाषा थोपने की सरकार की मंशा नहीं है. नई शिक्षा नीति पर सिर्फ एक रिपोर्ट सौंपी गई है, सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है, सरकार ने इसे अभी देखा तक नहीं है, ये गलतफहमी फैल गई है और ये झूठ है.’HRD Minister Ramesh Pokhriyal on reported proposal of 3-language system in schools: Committee has submitted its report to Ministry, it's not the policy. Public feedback will be sought, it's a misunderstanding that it has become a policy. No language will be imposed on any state. pic.twitter.com/hFhJLvAFHF
— ANI (@ANI) June 1, 2019
I&B Minister Prakash Javadekar on reported proposal of 3-language system in schools: There is no intention of imposing any language on anybody, we want to promote all Indian languages. It's a draft prepared by committee, which will be decided by govt after getting public feedback pic.twitter.com/t16JC3P8bf
— ANI (@ANI) June 1, 2019
तमिलनाडु में तीन भाषा सिस्टम का विरोध
बता दें तमिलनाडु में डीएमके सहित विभिन्न राजनीतिक दलों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्रस्तावित तीन भाषा फार्मूले का कड़ा विरोध किया है. उन्होंने इसे ठंडे बस्ते में डालने की मांग करते हुए दावा किया कि यह हिंदी को ‘थोपने’ के समान है. डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने कहा कि तीन भाषा फार्मूला प्राथमिक कक्षा से कक्षा 12 तक हिंदी पर जोर देता है. यह बड़ी हैरान करने वाली बात है और यह सिफारिश देश को बांट देगी.
डीएमके नेता स्टालिन ने तमिलनाडु में 1937 में हिंदी विरोधी आंदोलनों को याद करते हुए कहा कि 1968 से राज्य दो भाषा फार्मूले का ही पालन कर रहा है जिसके तहत केवल तमिल और अंग्रेजी पढ़ाई जाती है. उन्होंने केंद्र से ड्राफ्ट कमेटी की सिफारिशों को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि यह तीन भाषा फार्मूले की आड़ में हिंदी को थोपना है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सांसद संसद में शुरू से ही इसके खिलाफ आवाज उठाएंगे.
उन्होंने एआईएडीएमके पर निशाना साधते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी इसका कड़ा विरोध करें और ऐसा नहीं करने पर अपनी पार्टी के नाम से अन्ना और द्रविड़ शब्द हटा दें.
लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सहयोगी पीएमके ने भी आरोप लगाया कि तीन भाषा फार्मूले की सिफारिश हिंदी थोपने के समान है और वह चाहती हैं कि इसे खारिज किया जाए.
मक्कल निधि मैय्यम प्रमुख कमल हासन ने कहा कि चाहे भाषा हो या कोई परियोजना हम नहीं चाहते कि वह हम पर थोपी जाए. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसके खिलाफ कानूनी उपाय तलाशेगी. कमल हासन के मुताबिक वह हिंदी फिल्मों में अभिनय करते हैं, उनकी राय में हिंदी भाषा किसी पर थोपी नहीं जानी चाहिए.
Makkal Needhi Maiam founder Kamal Haasan on Centre's proposal on three-language system in schools: I have acted in many Hindi films, in my opinion Hindi language should not be imposed on anyone. #TamilNadu pic.twitter.com/eHWle8YJvb
— ANI (@ANI) June 1, 2019
वहीं तमिलनाडु के शिक्षा मंत्री के ए सेनगोतैयां ने कहा कि तमिलनाडु में चल रहे दो भाषा के फार्मूले में कोई परिवर्तन नहीं होगा. यहां पर केवल तमिल और अंग्रेजी ही पढ़ाई जाएगी.