जैसे-जैसे समय गुजर रहा है, चक्रवाती तूफान 'वायु' आगे बढ़ता जा रहा है. देश के पश्चिम तटीय समुद्री इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चक्रवाती तूफानों (Cyclone) का नाम कैसे तय किया जाता है? इसके बारे में जानना बहुत दिलचस्प होगा.
यह समझने से पहले कि किसी चक्रवात का नामकरण कैसे किया जाता है, हमें यह समझने की आवश्यकता है कि किसी चक्रवात को कोई नाम देना क्यों महत्वपूर्ण है. मुंबई मौसम विभाग के उप निदेशक के.एस., होसिल्कर ने 'इंडिया टुडे' को बताया कि चक्रवात का नाम दिया जाना बहुत महत्वपूर्ण होता है. कभी-कभी एक ही समुद्र या महासागर में एक साथ ही दो से तीन चक्रवात उठते हैं.
उन्होंने बताया कि इसलिए इन चक्रवाती तूफानों की पहचान किए जाने की जरूरत होती. बिना कंफ्यूज हुए इन पर निगरानी रखे जाने की भी जरूरत होती है. इसलिए इन चक्रवाती तूफानों का कोई न कोई नाम दिया है. दूसरी बात कि इन चक्रवाती तूफानों की स्थितियों का अध्ययन किया जाता है. इसलिए भी इनका नाम दिया जाना जरूरी होता है.
होसिल्कर ने आगे बताया कि पहले चक्रवाती तूफानों का नाम केवल स्त्रीलिंग में होता था, लेकिन अब पैटर्न बदला है. भारत दुनिया के दक्षिण क्षेत्र में पड़ता है. कुल आठ देश इस समूह में आते हैं और वे एक-एक करके बारी बारी से चक्रवाती तूफानों का नाम देते हैं. दक्षिणी क्षेत्र में बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं. ये देश एक-एक करके नाम देते हैं, जिन पर सभी देशों की बैठक में चर्चा होती है और बाद में इसे अंतिम रूप दिया जाता है.
होसिल्कर ने बताया कि अगली बार जब चक्रवाती तूफान आएगा तो उसका नामकरण मालदीव करेगा जिसका नाम हिका होगा. दिलचस्प बात यह कि चक्रवाती तूफानों का नाम पहले ही तय कर दिए जाते हैं और जब चक्रवाती तूफान आते हैं उन्हें वह नाम दे दिया जाता है.
अगर आप किसी चक्रवाती तूफान को कोई नाम देना चाहते हैं तो उसका तरीका सिम्पल है. मौसम विभाग ने बताया कि अगर लोग नाम देना चाहते हैं तो उसे लिस्ट में शामिल कर लिया जाता है. अगर प्रस्तावित नाम बुनियादी मानदंडों पर खरा उतरता है तो उस चक्रवाती तूफान का नाम वही रख दिया जाता है जो जनता चाहती है.
बहरहाल, मौसम विभाग का कहना है कि चक्रवाती तूफानों का नाम छोटा और आसानी से समझने लायक होना चाहिए ताकि जल्दी से लोगों की जुबान पर चढ़ जाए. यह भी ख्याल रखा जाता है कि इसका नाम संवेदनशील न हो और न ही भड़काऊ हो. कोई भी तूफान इतनी मौत और विनाश का कारण बनता है कि इसका नाम इस तरह रखा जाता है कि दोबारा इस्तेमाल न करना पड़े. इसलिए इसका बार-बार उपयोग नहीं किया जाता है.