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JNU केस: पटियाला हाउस में मार-पीट, सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार

सुप्रीम कोर्ट पटियाला हाउस कोर्ट की घटनाओं की एसआईटी से जांच कराने की मांग से जुड़ी एक याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करेगा. इस मामले पर न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एएम सप्रे की पीठ सुनवाई करेगी.

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पटियाला हाउस कोर्ट
पटियाला हाउस कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पटियाला हाउस कोर्ट की घटनाओं की एसआईटी से जांच कराने की मांग से जुड़ी एक याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करेगा. इन घटनाओं में पटियाला हाउस कोर्ट के तीन वकीलों को कैमरे पर कथित रूप से जेएनयू छात्र संघ के कन्हैया कुमार और पत्रकारों सहित अन्य को पीटने की ‘शेखी बघारते’ देखा गया.

दिल्ली पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की मांग
इस मामले पर न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति एएम सप्रे की पीठ सुनवाई करेगी. वे साथ ही कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद दायर पहली याचिका पर भी सुनवाई करेंगे. याचिका में अदालत परिसर में काले कोट पहने लोगों द्वारा छात्रों और पत्रकारों की पिटाई के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने के लिए उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है.

पीठ वकील आरपी लूथरा की याचिका पर सुनवाई करने पर राजी हो गई. लूथरा ने याचिका में कहा कि सुप्रीम कोर्ट को दंड प्रक्रिया संहिता का पालन करना चाहिए और यह संदेश नहीं देना चाहिए कि न्यायिक पदानुक्रम को नजरअंदाज किया जा रहा है.

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एमएल शर्मा की याचिका खारिज
कोर्ट ने हालांकि वकील एमएल शर्मा द्वारा दायर एक दूसरी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने तत्काल मामले में याचिकाकर्ता वकील द्वारा अदालत में फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया था. कोर्ट ने वकील कामिनी जायसवाल द्वारा दायर याचिका पर 26 फरवरी को केंद्र और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था. याचिका में वकील ने एसआईटी जांच और जिला अदालत परिसर में कन्हैया और अन्य को कथित रूप से पीटने के लिए वकीलों के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने की मांग की है.

SIT के गठन की भी मांग
याचिका में वकील विक्रम सिंह चौहान, यशपाल सिंह और ओम शर्मा पर इस आधार पर ‘स्वत: संज्ञान अवमानना कार्यवाही’ करने की मांग की गई है कि उन्हें कैमरे पर कथित रूप से हमलों को लेकर बात करते पकड़ा गया. इसमें 15 और 17 फरवरी को अदालत परिसर में हुए हमलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की भी मांग की गई.

याचिका में आरोप लगाया गया कि तीनों वकीलों ने ‘न्याय प्रक्रिया’ में हस्तक्षेप किया और 17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया. याचिका में गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को भी पक्ष बनाया गया है. इसमें कहा गया कि ऐसे तथ्य सामने आए हैं कि निचली अदालत के परिसर में ‘कानून के शासन का जोरदार तरीके से उल्लंघन’ किया गया.

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