सरकारी लॉटरी का वितरण करने वाली कंपनी 'सुगल एंड दमानी ग्रुप' के एक अधिकारी ने दावा किया है कि लॉटरी बिक्री के संबंध में नियमन एवं कर प्रणाली को दुरुस्त करने से सरकारी खजाने को 50 हजार करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त आय हो सकती है.
17 देशों में सरकारी लॉटरी परिचालन प्रौद्योगिकी मुहैया कराने वाली कंपनी 'सुगल एंड दमानी ग्रुप' ने कहा कि लॉटरी की बिक्री के ढांचे को दुरुस्त कर रोजगार के 10 लाख से अधिक अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं.
बता दें, मौजूदा समय में गोवा, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और सिक्किम समेत कुछ राज्यों में ही लॉटरी की बिक्री वैध है. लेकिन लॉटरी नियमन अधिनियम के तहत निजी कंपनियों को लॉटरी योजनाएं चलाने की अनुमति नहीं है.
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कमलेश विजय ने कहा कि लॉटरी के संबंध में नियमन एवं कर प्रणाली को दुरुस्त करने तथा इसके बारे में लोगों की धारणा बदलने से सरकारी खजाने को भारी लाभ पहुंच सकता है. उन्होंने कहा, 'भारत में लॉटरी में इतनी संभावना है कि यह सालाना आधार पर 35 से 50 हजार करोड़ रुपये सरकारी खजाने में पहुंच सकते हैं.'
कमलेश विजय ने कहा कि लॉटरियों के जरिए प्राप्त धन का इस्तेमाल अमेरिका, ब्रिटेन एवं चीन की तरह यहां भी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं तथा खेलों आदि के विकास पर खर्च किया जा सकता है. उन्होंने लॉटरियों से संबंधित मौजूदा कर ढांचे पर भी आपत्ति जाहिर की. माल एवं सेवा कर के तहत लॉटरी पर 12 से 28 प्रतिशत कर लगता है.