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सेना से स्कूल खाली कराए सरकारः सुप्रीम कोर्ट

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सेना और अर्धसैनिक बलों के कब्जे में जितने भी स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों के होस्टल हैं, वे दो महीने के भीतर खाली हो जाएं.

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उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सेना और अर्धसैनिक बलों के कब्जे में जितने भी स्कूल और शैक्षणिक संस्थानों के होस्टल हैं, वे दो महीने के भीतर खाली हो जाएं.

इस संबंध में न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी और न्यायमूर्ति एस एस निज्जर ने आदेश जारी कर दिए हैं. न्यायालय में मणिपुर और असम से 76 बच्चों की तमिलनाडु तस्करी संबंधी मामले की सुनवाई हो रही थी.

न्यायालय ने इस संबंध में गृह मंत्रालय को निर्देश दिए हैं कि वह सुनिश्चित करे कि सेना और अर्धसैनिक बल जिन स्कूलों और होस्टलों में ठहरे हुए हैं, वे सभी खाली हो जाएं. वहीं मानव संसाधन विकास मंत्रालय को दिए निर्देश में न्यायालय ने कहा है कि वह इन दोनों प्रदेशों के ऐसे स्कूलों की सूची बनाए, जहां सेना का कब्जा है.

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इसके अलावा खंडपीठ ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) को निर्देश दिए हैं कि वह विकास से जुड़े पहलुओं के बारे में पूर्वोत्तर के सातों प्रदेश के साथ बैठक करे. न्यायालय ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की अनुशंसाओं पर ये निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने आयोग से कहा था कि वह मणिपुर और असम के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के नाम पर तमिलनाडु में तस्करी के मामले की जांच करे.

खंडपीठ ने मणिपुर, असम, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक से कहा है कि वह एनसीपीसीआर की अनुशंसाओं के आधार पर प्रदेशों में ऐसी अपंजीकृत परमार्थ संस्थाओं को बंद करें, जो स्कूल और होस्टल चला रही हैं.

न्यायालय ने मणिपुर और असम से कहा है कि वे इन सुझावों के आधार पर अपना हलफनामा दाखिल करें.

आयोग ने न्यायालय से कहा था कि उसे प्रदेश सरकार के साथ मिलकर इस मामले की समीक्षा के लिए अधिकार दिए जाएं. खंडपीठ ने इस याचिका को भी स्वीकार कर लिया.

न्यायालय ने 31 मार्च को आयोग को इस मामले की जांच करने के आदेश दिए थे. मीडिया में ऐसे 76 बच्चों की बरामदगी की खबरें छपी थी, जिनके आधार पर न्यायालय में एक अपील दायर हुई थी.

तमिलनाडु सरकार ने इसके पहले कहा था कि कन्याकुमारी पुलिस अधीक्षक की जांच से पता चलता है कि रेव पॉल नाम का एक व्यक्ति मणिपुर और असम के 76 बच्चों को बेहतर शिक्षा के नाम पर पूर्वोत्तर से यहां लाया था.

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