कृषि मंत्री शरद पवार ने मंगलवार को कहा कि सरकार गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न वितरित करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का सम्मान करेगी.
लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के जवाब में पवार ने कहा, ‘यह सरकार उच्चतम न्यायालय के फैसले का सम्मान करेगी. सदस्यों के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा.’ उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उसने गोदामों में खाद्यान्न को सड़ने देने के बजाय उसे मुफ्त गरीबों में बांटने का आदेश दिया था.
पवार ने हालांकि इसे सुझाव बताया. लोकसभा में पवार ने कहा कि उन्हें मीडिया से उच्चतम न्यायालय के फैसले के बारे में जानकारी मिली है और उन्होंने अदालत के आदेश की प्रति हासिल करने के प्रयास भी किए.
उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत के आधिकारिक आदेश को पढ़े बिना कोई टिप्पणी करना उनके लिए ‘उचित’ नहीं होगा क्योंकि इससे सदन को गुमराह करने की बात आ जाएगी. स्वराज ने कहा कि उच्चतम न्यायालय अपने पूर्व के आदेश पर पवार के बयान पर आपत्ति जताते हुए नया आदेश दिया है.
पवार ने पहले के आदेश पर कहा था कि शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया था जिसे लागू नहीं किया जा सकता. न्यायालय ने सरकारी वकील से कहा, ‘यह सुझाव नहीं था. यह हमारे आदेश में था. आप मंत्री को बताइए.’ न्यायालय ने 12 अगस्त को दिए अपने फैसले में केन्द्र से कहा था कि वह गरीबों को मुफ्त खाद्यान्न वितरित करने पर विचार करे.