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बीटी बैगन के इस्‍तेमाल पर असमंजस में सरकार

आनुवांशिक तौर पर उन्नत किस्म ‘बीटी बैगन’ के इस्तेमाल पर सरकार ने कुछ भी साफ नहीं किया है. ‘बीटी बैगन’ पर तमाम संगठनों ने विरोध जाहिर किया था.

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आनुवांशिक तौर पर उन्नत किस्म ‘बीटी बैगन’ के इस्तेमाल पर सरकार ने कुछ भी साफ नहीं किया है. ‘बीटी बैगन’ पर तमाम संगठनों ने विरोध जाहिर किया था.

इससे पहले देश में व्यावसायिक इजाजत देने के बारे में केंद्र सरकार 10 फरवरी को फैसला सुनाने वाली है. हालांकि पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश संकेत दे चुके हैं कि इस संबंध में किये जाने वाले निर्णय में आम आदमी की भावनाओं का खयाल रखा जायेगा.

पर्यावरण मंत्रालय बीटी बैगन के बारे में फैसला करने की अपनी प्रक्रिया में खासी गोपनीयता बरत रहा है. बताया जा रहा था कि इसके लिये विशेषज्ञों का एक दल काम कर रहा है जो विभिन्न शहरों से मिली राय और राज्यों की दलील के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर रहा है.

उन्होंने कहा कि कोई 10 से 15 पृष्ठ की रिपोर्ट तैयार की गई है लेकिन इसका खुलासा 10 फरवरी को पर्यावरण मंत्री ही करेंगे. उधर, कई राज्यों के विरोध और जन सुनवाई के दौरान तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना करने के बाद रमेश ने संकेत दिये हैं कि बीटी बैगन पर फैसले में आम जनता की भावना का ध्यान रखा जायेगा.

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रमेश ने गत सोमवार को कोच्चि में संवाददाताओं से कहा था कि मुझे जनमत के बारे में संवेदनशील और विज्ञान के प्रति जिम्मेदार होना होगा. मुझे उपभोक्ताओं और निर्माताओं के हितों तथा जैव विविधता की सुरक्षा पर गौर करना होगा. साथ ही कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने की जरूरत पर भी मुझे विचार करना होगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि फैसला करना आसान नहीं है. मुझे यह अपेक्षा नहीं है कि मैं जो निर्णय करूंगा, उससे कोई भी खुश होगा.

बीटी किस्म की फसलों जैसे मामलों का नियामक निकाय ‘आनुवांशिकी आभियांत्रिकी मंजूरी समिति’ (जीएईएसी) गत वर्ष अक्‍टूबर में ही बीटी बैगन के इस्तेमाल को हरी झंडी दिखा चुका था. बहरहाल, समिति की एक सदस्य ने कहा था कि फैसला करने से पहले सभी जरूरी परीक्षण नहीं किये गये हैं. बाद में राज्यों की ओर से भी बीटी बैगन के विरोध में स्वर उठने लगे. इसके बाद रमेश ने इस मुद्दे पर सलाह मशविरा करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुनवाई शुरू करने का फैसला किया.

गत जनवरी से शुरू हुई सुनवाई कोलकाता, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ और बैंगलोर सहित सात शहरों में होने के बाद बीती छह फरवरी को खत्म हुई. इस दौरान रमेश को कई बार तीखी प्रतिक्रिया का भी सामना करना पड़ा. इस कवायद के बाद पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रमेश को पत्र लिखकर बीटी बैगन के प्रति अपना विरोध जता चुके हैं. गौरतलब है कि बीटी बैगन को भारत के कृषि क्षेत्र में व्यावसायिक इस्तेमाल की इजाजत दी जाये या नहीं, इस पर फैसला पर्यावरण मंत्रालय को करना है.

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