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देश के फ्लड बेल्ट, ये नदियां हर साल मचाती हैं तबाही

एशियन डेवलपमेंट बैंक के मुताबिक भारत में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाओं में बाढ़ सबसे अधिक तबाही का कारण है. देश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान में बाढ़ की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है.

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Flood, PTI photo
Flood, PTI photo
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण हालात गंभीर
  • बिहार, असम से लेकर गुजरात में हर साल आती है बाढ़
  • कोसी, ब्रह्मपुत्र, गंडक, कमलाबलान नदियों का पानी उफान पर
  • असम में 24 से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में, बिहार में भी तबाही

देश में मॉनसून पीक पर है और इसी के साथ देश के अधिकांश हिस्सों में बाढ़ की तबाही भी जारी है. बिहार, असम, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, यूपी, उत्तराखंड समेत कई राज्य बाढ़ की चपेट में हैं. लाखों की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है और बड़ी संख्या में लोग बेघर हो चुके हैं.

देश के कई राज्यों के लिए बाढ़ की तबाही हर साल आने वाली मुसीबत बन गई है. देश के कई रिवर बेसिन तबाही के इलाके हो गए हैं. हर साल सूखे दिनों में लोग अपना आशियाना बनाते हैं और बरसात में आने वाली बाढ़ सबकुछ बहा ले जाती है. इसी के साथ किसानों की खेतों में खड़ी फसल भी तबाह हो जाती है.

बाढ़ से हर साल कितनी तबाही?
एशियन डेवलपमेंट बैंक के मुताबिक भारत में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाओं में बाढ़ सबसे अधिक तबाही का कारण है. देश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान में बाढ़ की हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी है. अनियमित मॉनसून पैटर्न और कुछ इलाकों में कम और कहीं अधिक बरसात इस तबाही को कुछ इलाकों में और बढ़ा देता है.

हर साल बाढ़ के कारण हताहत लोगों के अलावा बड़े पैमाने पर मकान, कारोबार, फसलों को भी नुकसान पहुंचता है. एक अनुमान के मुताबिक बाढ़ के कारण भारत में पिछले 6 दशकों में करीब 4.7 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान हुआ है.

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नदियां जो हर साल बनती हैं तबाही का कारण-

-असम में ब्रह्मपुत्र की तबाही: इस साल भी असम के 33 में से 26 जिले बाढ़ की चपेट में हैं. चीन से निकलने वाली ब्रह्मपुत्र नदी दुनिया की नौंवी सबसे लंबी नदी है. हर साल बरसात में यहां का पानी असम ही नहीं, अरुणाचल प्रदेश और बांग्लादेश के कई इलाकों में भी तबाही मचाता है.

-बिहार में कोसी का कहर: हर साल आसपास के इलाकों में तबाही के कारण कोसी नदी को बिहार का अभिशाप कहा जाता है. खासकर सहरसा, सुपौल, मधेपुरा और आसपास के जिलों में तबाही हर साल की बात है. 2008 में कोसी नदी में आई बाढ़ के कारण 23 लाख लोग प्रभावित हुए थे.

-बिहार में गंडक-बागमती-कमला बलान नदियों से तबाही भी हर साल की बात हो गई है. नेपाल से आने वाली ये नदियां उत्तर बिहार के कई इलाकों में हर साल बड़ा नुकसान करती हैं. पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, वैशाली एवं सारण जिलों के कई इलाके इस बार भी बाढ़ की चपेट में हैं. वहीं बागमती से सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी जिलों के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं.

-गोमती नदी से यूपी में तबाही हर साल की बात है. गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जिले की तहसील माधौटान्डा के पास फुल्हर झील से होता है. भारी बारिश के कारण गोमती समेत कई नदियों का पानी उफान पर है. सैंकड़ों गांवों में पानी घुस चुका है.

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-नर्मदा नदी को मध्य प्रदेश में विशाल योगदान के कारण जीवन रेखा कहा जाता है. लेकिन इसी नर्मदा का उफनता पानी मध्य प्रदेश और गुजरात के कई इलाकों में हर साल तबाही का कारण भी बनता है. जून 2015 में आए मॉनसून ने गुजरात को पानी-पानी कर दिया था. गुजरात के कई हिस्से जलमग्न हो गए थे. इस बाढ़ में कुल 123 लोगों की मौत हो गई थी.

-गोदावरी नदी महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से बहते हुए राजमुन्दरी शहर के समीप बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है. इसकी उपनदियों में प्रमुख हैं प्राणहिता, इन्द्रावती, मंजिरा. पिछले साल गोदावरी नदी में आई बाढ़ ने आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी और पश्चिमी गोदावरी जिले और महाराष्ट्र के नासिक के कई हिस्सों को डुबो दिया था. इस बार भी नदी का पानी उफान पर है और आसपास के इलाकों में भय पैदा कर रहा है.

-दामोदर नदी पश्चिम बंगाल और झारखंड में बहने वाली प्रमुख नदी है. यह लगभग 290 KM का सफर झारखंड में तय करती है. उसके बाद पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर 240 KM का सफर तय करती है. हुगली नदी के समुद्र में गिरने के पूर्व यह उससे मिलती है. इसके पानी में उफान से दोनों राज्यों के कई इलाकों पर असर होता है.

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-उत्तर भारत की जीवनरेखा कही जाने वाली गंगा नदी भारत और बांग्लादेश में कुल मिलाकर 2525 किलोमीटर की दूरी तय करती है. जलस्तर वैसे तो अभी स्थिर है लेकिन लगातार बारिश से कभी भी इस नदी का पानी विकराल रूप ले सकता है.

-कावेरी कर्नाटक तथा उत्तरी तमिलनाडु में बहने वाली सदानीरा नदी है. दक्षिण पूर्व में प्रवाहित होकर कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है. सिमसा, हिमावती, भवानी इसकी उपनदियां हैं. पिछले साल कावेरी के जलस्तर बढ़ने से कोडग़ू, मैसूरु, मंड्या आदि जिलों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया था.

ये भी एक सच है कि जो नदियां अपने आसपास के इलाकों में खुशहाली का कारण होती हैं वही कई बार अपने आसपास के इलाकों में तबाही का कारण भी बन जाती हैं. बिहार जैसे उपजाऊ राज्य में उत्तर बिहार का 73.63 हिस्सा हर साल बाढ़ के खतरे का सामना करता है. बिहार के 38 जिलों में से 28 बाढ़ के खतरे वाले माने जाते हैं. हर साल होने वाली तबाही को देखते हुए फ्लड बेल्ट के इलाकों को लेकर राज्य सरकारों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर बड़े प्लान बनाने होंगे और उसपर काम करना होगा.

 

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