कुछ दिनों पहले एक दिल दहलाने वाला वीडियो सामने आया था जिसमें एक छोटा बच्चा अपनी मृत मां को जगाने की कोशिश कर रहा था. बिहार के मुजफ्फरपुर रेलवे स्टेशन पर महिला का शव लावारिस हालत में पड़ा था और मां की मौत से अनजान अबोध बच्चा उसका आंचल पकड़कर खींच रहा था. यह वीडियो देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान सामने आई प्रवासी समस्या का प्रतीक बन गया.
अब इसी तरह की एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें एक महिला जख्मी हालत में जमीन पर पड़ी है और उसका बच्चा मां का दूध पी रहा है. तस्वीर में दावा किया जा रहा है कि ये महिला मध्य प्रदेश के दमोह में रेल की पटरियों पर मृत पड़ी हुई है और इस बात से अनजान उसका बच्चा मां का दूध पीने की कोशिश कर रहा है. सोशल मीडिया यूजर्स इस पोस्ट को कोरोना संकट के दौरान प्रवासी कामगारों की दुर्दशा से जोड़कर शेयर कर रहे हैं.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि यह घटना दमोह की ही है, लेकिन 2017 की है. इस तस्वीर के साथ पोस्ट में लिखा गया है, “आत्मनिर्भर भारत का बच्चा. मध्य प्रदेश के दमोह में रेलवे ट्रैक पर महिला मृत पड़ी है और बच्चा दूध पीने की कोशिश कर रहा है. #MigrantsLivesMatter #MigrantWorkers #MODI #MigrantsOnTheRoad #PMCares #India #CoronaVirus #COVID #CoronaVirusTruth #CoronaVillains”.
पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है. तमाम फेसबुक यूजर तीन साल पुरानी इस तस्वीर को हाल की तस्वीर समझ कर शेयर कर रहे हैं.
इसे शेयर करते हुए कई यूजर्स ने “India Today ” के एक आर्टिकल का भी हवाला दिया है. हालांकि, इस आर्टिकल में ही घटना के बारे में विस्तार से सूचना मौजूद है. यह आर्टिकल 25 मई, 2017 को प्रकाशित हुआ था और इसमें इस दावे का सच भी मौजूद है. तीन साल पहले जब यह घटना घटी थी, उस समय कई वीडियो और फोटो सामने आए थे.

महिला की मौत का कारण पता नहीं चल सका था, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को शक था कि वह या तो ट्रेन से गिर गई होगी या किसी ट्रेन की टक्कर से उसकी मौत हुई. इस घटना के बारे में “एनडीटीवी ” और “हिंदुस्तान टाइम्स ” ने भी रिपोर्ट प्रकाशित की थी.
साफ है कि तीन साल पुरानी तस्वीर को मौजूदा प्रवासी संकट से जोड़कर शेयर किया जा रहा है. हालांकि, यह तथ्य है कि प्रवासी कामगारों, मजदूरों और शहरों में रहने वाले प्रवासियों को लॉकडाउन का गंभीर खामियाजा उठाना पड़ा है. काम न मिलने के कारण असंख्य लोग अपने घर वापस लौटने लगे और इसके लिए पैदल चलकर सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय की.