देश की राजधानी का एक जाना माना स्कूल एक लड़की एक-एक सांस के लिए छटपटाती रही और स्कूल उसके घर से गाड़ी आने का इंतज़ार करता रहा. आखिर में वह लड़की नहीं बची.
ये वाकया है दिल्ली के नामी-गिरामी मॉडर्न स्कूल का. लड़की का परिवार मौत के लिए स्कूल प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहा है. वे लोग आज इसकी शिकायत पुलिस से भी करने वाले हैं. परिवार वालों का आरोप है कि समय रहते स्कूल ने छात्रा को डॉक्टरी मदद नहीं दी. आकृति वसंत विहार के मॉर्डन स्कूल की 12वीं छात्रा थी. वो अस्थमा की मरीज़ थी.
सोमवार सुबह करीब दस बजे अस्थमा का दौरा पड़ा. परिवार के लोग कह रहे हैं कि उन्होंने आकृति को फ़ौरन घर भेजने को कहा लेकिन स्कूल से आकृति की मां को फोन आया और उन्हें गाड़ी भेजने को कहा गया. इस दौरान उसे ऑक्सीजन मास्क लगा कर स्कूल में ही रखा गया. घर से गाड़ी आने में करीब एक घंटे लग गए और तब उसका ऑक्सिजन मास्क हटा कर उसे अस्पताल भेजा गया.
अस्पताल में डॉक्टरों नें उसे मृत घोषित कर दिया. परिवार का आरोप है कि स्कूल को तुरंत ऐम्बुलेंस बुला कर अस्पताल भेजना चाहिए था लेकिन स्कूल प्रशासन घर से गाड़ी भेजे जाने का इंतज़ार करता रहा. छात्रा के पिता का ये भी आरोप है कि घरवालों को डरा धमका कर उनसे अस्पताल में ही एक कागज़ पर ये लिखवा लिया गया कि छात्रा की मौत के लिए स्कूल प्रशासन ज़िम्मेदार नहीं है.
वो स्कूल प्रशासन जो ज़िंदगी के लिए छटपटाती लड़की का दम घुटते देखता रहा और उसके घर से गाड़ी आने का इंतज़ार करता रहा. मां-बाप अपने बच्चों को इस भरोसे के साथ स्कूल भेजते हैं कि उनका बच्चा वहां महफ़ूज़ है, लेकिन आकृति के साथ क्या हुआ. क्या उसे बचाया नहीं जा सकता था. स्कूल पर लग रहे आरोप अगर सही हैं तो कुछ सवाल उनके लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं.
पहला ये कि जब स्कूल को मालूम था कि आकृति अस्थमा की मरीज़ है तो उसे दौरा आने के बाद तुरंत अस्पताल क्यों नहीं भेजा गया. स्कूल ने अपनी गाड़ी में छात्रा को अस्पताल क्यों नहीं भेजा?