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दिल्ली की कच्ची कॉलोनियां कब तक होंगी नियमित, क्या-क्या मिलेंगे कानूनी अधिकार

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी संसद में नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ डेल्ही (रिकॉग्निशन ऑफ प्रॉपर्टी राइट्स ऑफ रेजिडेंट्स इन अनाथॉराइज्ड कॉलोनीज) बिल- 2019 पेश करेंगे. हाल ही पीएम मोदी सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने का ऐलान किया है.

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पीएम मोदी और बीजेपी के अन्य नेता (Photo Courtesy- www.narendramodi.in)
पीएम मोदी और बीजेपी के अन्य नेता (Photo Courtesy- www.narendramodi.in)

  • उपराज्यपाल बैजल ने कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने का दिया आदेश
  • पीएम उदय योजना के तहत कच्ची कॉलोनियों को किया जा रहा है नियमित
  • कच्ची कॉलोनियों की जमीनों की होगी रजिस्ट्री, लोगों को मिल सकेगा लोन
मोदी सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने का ऐलान किया है. दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने के लिए अधिसूचना भी जारी कर दी है. बुधवार को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी संसद में नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ डेल्ही (रिकॉग्निशन ऑफ प्रॉपर्टी राइट्स ऑफ रेजिडेंट्स इन अनाथॉराइज्ड कॉलोनीज) बिल- 2019 पेश करेंगे.

दिल्ली की इन कॉलोनियों को प्रधानमंत्री अनाधिकृत कॉलोनी आवास अधिकार योजना यानी पीएम उदय योजना (PM-UDAY) के तहत नियमित किया जा रहा है. दिल्ली के उपराज्यपाल बैजल ने ट्वीट कर बताया कि पीएम उदय योजना के तहत दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने को मंजूरी दे दी गई है. इसके तहत दिल्ली के 79 गांवों का शहरीकरण किया जाएगा. साथ ही कच्ची कॉलोनियों के लोगों के खिलाफ दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम-1954 की धारा 81 के तहत दर्ज किए गए केस भी वापस लिए जाएंगे.

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कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया में लगेंगे 6 महीने

अब सवाल यह है कि कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया पूरी करने में कितना समय लगेगा? इससे कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को क्या-क्या फायदे होंगे और उनको कौन-कौन से कानूनी अधिकार मिलेंगे? सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने की प्रक्रिया में ही कम से कम 6 महीने का समय लग जाएगा.

दूसरी कॉलोनियों की तरह कच्ची कॉलोनियों में भी मिलेंगे अधिकार

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जितेंद्र मोहन शर्मा और एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा ने बताया कि पीएम उदय योजना के तहत कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने से इनमें रहने वाले लोगों को मालिकाना हक समेत कई कानूनी अधिकार मिल जाएंगे. साथ ही वो सभी सुविधाएं मिलने लगेंगी, जो दिल्ली की दूसरी कॉलोनियों के लोगों को मिलती हैं.

जमीन की होगी रजिस्ट्री और मिलेगा लोन

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट जितेंद्र मोहन शर्मा और एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा के मुताबितक इन कॉलोनियों की जमीन और मकानों की रजिस्ट्री हो सकेगी. इसके बाद कॉलोनियों के लोग अपनी जमीन और मकान पर लोन ले सकेंगे. इन लोगों को अपनी जमीन को बेंचने का भी कानूनी अधिकार मिल जाएगा. कई कच्ची कॉलोनियों में नाले और सीवर लाइन भी नहीं हैं. अब इनमें नाले बनाने और सीवर लाइन बिछाने का काम भी शुरू होने का रास्ता साफ हो जाएगा.

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सीनियर एडवोकेट जितेंद्र मोहन शर्मा ने बताया कि अभी तक कच्ची कॉलोनियों की जमीन की रजिस्ट्री नहीं होती थी. सिर्फ एग्रीमेंट के आधार पर लोग कब्जा कर लेते थे. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सूरज लैंप एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनाम हरियाणा राज्य मामले में फैसला सुनाते हुए साफ कहा था कि सेल एग्रीमेंट और जनरल पॉवर ऑफ अटॉर्नी के जरिए कब्जा की गई जमीन को न तो बेचा जा सकता है और न ही ट्रांसफर किया जा सकता है. ऐसे एग्रीमेंट के जरिए किसी जमीन या मकान में मालिकाना हक नहीं मिलता है.

किन लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमें?

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बताया कि कच्ची कॉलोनियों के जिन लोगों पर दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 81 के तहत मुकदमें दर्ज किए गए थे, उनको वापस लिए जाएंगे. एक सवाल के जवाब में एडवोकेट उपेंद्र शर्मा ने बताया कि दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 81 के तहत ग्रामीण इलाकों की कृषि योग्य भूमि में घर बनाना गैर कानूनी है. इसके तहत कृषि योग्य भूमि का सिर्फ खेती और बागवानी के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है.

उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने कृषि योग्य जमीन को सस्ते में खरीदकर या किसी अन्य तहत से कब्जा करके घर बनाया था, उनके खिलाफ दिल्ली भूमि सुधार अधिनियम की धारा 81 के तहत मुकदमें दर्ज किए गए थे. अब इन मुकदमों को वापस लिया जाएगा.

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