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BJP का वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार का आरोप

बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है. उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वह उनके खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाने को कहेंगे या घूसखोरी के प्रति ‘दिखावटी गुस्सा’ ही दिखाते रहेंगे. उन्होंने मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की.

अरुण जेटली अरुण जेटली

बीजेपी ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने वीरभद्र सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा है. उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वह उनके खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाने को कहेंगे या घूसखोरी के प्रति ‘दिखावटी गुस्सा’ ही दिखाते रहेंगे. उन्होंने मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की.

जेटली ने इस बारे में प्रधानमंत्री को लिखे पत्र की जानकारी सोमवार को देते हुए दावा किया कि वीरभद्र के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों के ‘पक्के सुबूत’ हैं. उन्होंने साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से पूछा कि ऐसे कथित पुख्ता आरोपों के बावजूद वीरभद्र मुख्यमंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं.

उन्होंने कहा, ‘क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी उनसे निपटने पाने में अक्षम हैं’? राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इससे पहले वीरभद्र पर ‘इस्पात समूह’ और किन्हीं आनंद चौहान से धन लेने के आरोपों में ‘अगर-मगर’ हो सकती है लेकिन प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने जिस साई कोठी पन बिजली परियोजना और उससे जुड़े मैसर्स वेंचर एनर्जी एंड टेक्नालॉजी प्रा. लि. मामले का उल्लेख किया है उसमें वीरभद्र पर भ्रष्टाचार का ‘पक्का मामला’ बनता है.

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने पर वीरभद्र ने 17 अक्तूबर 2012 को निर्वाचन अधिकारी को दिए संपत्ति और देनदारियों के हलफनामे में उक्त कंपनी से ऋण लेने का कोई उल्लेख नहीं किया है. लेकिन मंडी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा उप चुनाव लड़ने पर उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह ने 30 मई 2013 को दिए हलफनामे में बताया कि पन बिजली परियोजना से जुड़ी उक्त कंपनी के प्रमोटर वकमुल्ला चन्द्रशेखर से उन्होंने डेढ़ करोड़ और उनके पति वीरभद्र सिंह ने 2. 40 करोड़ रुपयों का ऋण लिया.

जेटली ने कहा, हालांकि उस समय के दस्तावेज बताते हैं कि जिस समय ऋण लिए गए उस वक्त दोनों के खातों में अतिरिक्त धन था और उन्हें ऋण की जरूरत नहीं थी. बीजेपी नेता ने इसे ‘भ्रष्टाचार और हितों के टकराव’ का मामला बताया. उन्होंने कहा कि अगर ऋण लिया भी गया तो उस कपंनी के प्रमोटर से क्यों लिया गया जिसे राज्य में पन बिजली परियोजना का ठेका दिया गया है.

उन्होंने कहा कि इस कंपनी को सरकार को 58.19 लाख रुपये देने हैं जो अभी तक नहीं दिए गए हैं. प्रधानमंत्री से उन्होंने आग्रह किया कि वह इस मामले की सीबीआई से जांच के तुरंत आदेश दें.

 

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