विप्रो चेयरमैन अजीम प्रेमजी ने रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच साझा किया. हालांकि बाद में इस पर उन्होंने कहा कि इसका यह मतलब नहीं है कि वह संघ की विचारधारा से सहमति रखते हैं.
अपना रुख स्पष्ट करते हुए प्रेमजी ने कहा, कुछ लोगों ने मुझसे कहा कि मोहन भागवत के साथ मंच साझा करने से संदेश जाएगा कि मैं संघ की सोच का समर्थन करता हूं. किसी मंच पर बोलने का यह मतलब नहीं है कि आप इस मंच के सभी या किसी एक विचार से सहमत हों.
प्रेमजी संघ से जुड़े राष्ट्रीय सेवा भारती के रविवार को शुरू हुए ‘राष्ट्रीय सेवा संगम’ नाम के तीन दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा लेने आए थे. संगम में अपने संबोधन में संगठन के काम की तारीफ की और कहा कि इसीलिए वह यहां आए हैं. प्रेमजी ने कहा कि संघ के समाजसेवी संगठनों ने महान कार्य किए हैं और वह उसका सम्मान करते हैं. जीएमआर ग्रुप चेयरमैन जीएमराव और जी ग्रुप चेयरमैन सुभाष चंद्रा भी इस समारोह के हाईप्रोफाइल मेहमानों में थे.
अपने संबोधन में उन्होंने भ्रष्टाचार से हर स्तर पर लड़ने का आह्वान किया और महिलाओं, बच्चों तथा वंचित वर्गो के लिए उत्थान के लिए काम करने का आहवान किया. उन्होंने गरीबी हटाने के लिए भी काम करने को कहा. विप्रो प्रमुख ने देश निर्माण के लिए शिक्षा की जरूरत बताई और शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा.