इतिहासकार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित रोमिला थापर से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीवी जमा करने को कहा है. ताकि यह विचार किया जा सके कि जेएनयू में उनकी सेवाएं एमेरिटा प्रोफेसर के रूप में जारी की जाएं या नहीं. इस मामले पर जवाहरलाल नेहरू शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का रोमिला थापर से सीवी मांगने का फैसला राजनीतिक रूप से प्रेरित है.
वहीं विश्वविद्यालय ने कहा कि वह जेएनयू में प्रोफेसर एमेरिटस के पद पर नियुक्ति के लिए अपने अध्यादेश का पालन कर रहा है. अध्यादेश के मुताबिक, विश्वविद्यालय के लिए यह जरूरी है कि वह उन सभी को पत्र लिखे जो 75 साल की उम्र पार कर चुके हैं ताकि उनकी उपलब्धता और विश्वविद्यालय के साथ उनके संबंध को जारी रखने की उनकी इच्छा का पता चल सके. पत्र सिर्फ उन प्रोफेसर एमेरिटस को लिखे गए हैं जो इस श्रेणी में आते हैं.
विश्वविद्यालय ने कहा है कि पत्र उनकी सेवा को खत्म करने के लिए नहीं जारी किया गया है. वहीं दूसरी तरफ थापर ने इस बात की पुष्टि की कि उन्हें जुलाई में पत्र मिला था और उन्होंने इसका जवाब दिया है, "यह जीवन भर का सम्मान है." उन्होंने और जानकारी नहीं दी.
जेएनयूटीए ने कहा कि रोमिला थापर से सीवी मांगना जानबूझकर उन लोगों को बेइज्जत करने का प्रयास है जो वर्तमान प्रशासन के आलोचक हैं. जेएनयूटीए ने इस मुद्दे को लेकर थापर के लिए व्यक्तिगत माफी जारी करने की भी मांग उठाई. साथ ही कहा कि प्रोफेसर थापर का अपमान राजनीतिक रूप से प्रेरित एक और कदम है.
बता दें जेएनयू के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार ने पिछले महीने रोमिला थापर को पत्र लिखकर उनसे सीवी जमा करने को कहा था. पत्र में लिखा था कि विश्वविद्यालय एक समिति का गठन करेगी जो थापर के कामों का आकलन करेगी. जिसके बाद फैसला लिया जाएगा कि रोमिला प्रोफेसर एमेरिटा के तौर पर जारी रहेंगी या नहीं. बता दें रोमिला थापर केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचक रही हैं.