अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों और विभिन्न शिक्षक संघों के सदस्यों ने शनिवार को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 48 शिक्षकों के समर्थन में एक बयान जारी किया है. बयान में कहा गया है कि जेएनयू के जिन 48 शिक्षकों को शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सीसीएस नियमों के तहत नोटिस दिए गए, उसका सभी स्तरों के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के तौर पर विरोध करते हैं.
दरअसल, इन शिक्षकों के खिलाफ पिछले साल एक दिन की हड़ताल में भाग लेने के कारण अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई थी. जिन शिक्षकों के खिलाफ जेएनयू प्रशासन कार्रवाई कर रहा है उन शिक्षकों के प्रति दुनिया भर के 2000 शिक्षकों ने समर्थन जताया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रशासन द्वारा केंद्रीय सिविल सेवा (CCS) नियमों को आधार बनाकर 48 शिक्षकों के खिलाफ चार्जशीट जारी करने के कदम का पूरे अकादमिक जगत में विरोध हो रहा है. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जेएनयू के उन 48 शिक्षकों और अकादमिक स्वतंत्रता के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों, दूसरे विश्वविद्यालयों के शिक्षक संघों, प्रोफेसर अपूर्वानंद, मनोज झा और हर्ष मंदर सहित और दूसरे अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देश-विदेश के करीब दो हजार शिक्षकों, विद्यार्थियों और जागरूक नागरिकों से समर्थन वाला बयान जारी किया.
जारी बयान में कहा गया कि जेएनयू के जिन 48 शिक्षकों को शिक्षा विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सीसीएस नियमों के तहत जो नोटिस दिए गए, सभी स्तरों के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के तौर पर हम इसका विरोध करते हैं.
बयान में कहा गया, 'हम इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं कि जेएनयू शिक्षक संघ का विरोध प्रदर्शन लगातार जेएनयू एक्ट के उल्लंघन के खिलाफ था. JNU प्रशासन ने लगातार आरक्षण नीति के उल्लंघन, जबरन अटेंडेंस पॉलिसी को लागू करने, मनमाने तरीके से विभागों के अध्यक्षों और डीनों की नियुक्ति और उन्हें हटाने, अकादमिक और कार्यकारी परिषदों की बैठकों को तोड़-मरोड़कर पेश करने, शिक्षकों को परेशान करने, एमफिल और पीएचडी के लिए स्काइप से वाइवा करने और आईपीआर पॉलिसी ड्राफ्ट करने जैसे जेएनयू विरोधी कदम उठाए हैं. हम समझते हैं कि JNU शिक्षक संघ का विरोध प्रदर्शन जेएनयू एक्ट की रक्षा के लिए था.'
बता दें कि इस वक्तव्य में डेविड गॉर्डन व्हाइट, डेविड हार्डीमेन, गायत्री चक्रवर्ती स्पिवाक, ज्यूडिथ बटलर, पार्था चटर्जी, शेल्डन पोलॉक और थॉमस गनिंग जैसे ख्यातिप्राप्त अंतराष्ट्रीय विद्वानों का भी समर्थन हासिल है.
हैदराबाद विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, अंबेडकर विश्वविद्यालय, राजीव गांधी विश्वविद्यालय, अलीगढ़ विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, इग्नू इत्यादि ने भी जेएनयू प्रशासन के खिलाफ जारी इस स्टेटमेंट को अपना-अपना समर्थन दिया है.