बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद अगर पाकिस्तान कोई बड़ी हिमाकत करता तो भारतीय सेना उस स्थिति में भी लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार थी. थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने तब गोलाबारूद जैसी कमी जैसी चिंताओं के दूर होने पर सरकार को आश्वस्त किया था. ऐसा किए जाने से सेना के शीर्ष नेतृत्व को भरोसे से सरकार को कहने का मौका मिला कि अगर पाकिस्तान ज़मीन पर तनाव को बढ़ाता है तो भारतीय सेना का हाथ ऊपर रहेगा.
वाइस चीफ्स को मिले आपातकालीन अधिकार के तहत 18,000 करोड़ रुपये का गोलाबारूद और अन्य युद्ध सामग्री हासिल की जा चुकी थी. इसके अलावा और भी सैन्य साजोसामान पाइप लाइन में था.
सेना के एक सूत्र ने बताया, ‘जब बालाकोट एयरस्ट्राइक की रणनीति बनाई जा रही थी तब पाकिस्तान के जमीन पर जवाबी कदम को लेकर बड़ी चिंता थी. लेकिन भारतीय सेना ने सरकार को आश्वस्त किया कि पाकिस्तानी सेना की ओर से तनाव बढ़ाने की किसी भी हिमाकत को नाकाम करने के लिए वह पूरी तरह तैयार है.’
थलेसना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने इसी को लेकर हाल में सेवानिवृत्त अधिकारियों के सेमिनार में बात की थी. सेना के सूत्रों ने बताया गोलाबारूद को लेकर क्रिटिकल कमी के मद्देनजर भारतीय सेना की क्षमताओं को लेकर तब चिंताएं जता रही थीं लेकिन सेनाप्रमुख की ओर से सरकार को आश्वस्त किया गया कि कमियों को पूरा कर लिया गया है और पाकिस्तान के हिमाकत दिखाने पर सेना सेक्टरों में ‘युद्ध के लिए तैयार’ स्थिति में है.
भारतीय सेना ने उन क्रिटिकल कमियों को पूरा कर लिया था जो 2016 में उरी हमले के बाद इंगित की गई थीं. उरी हमले में 19 भारतीय जवान शहीद हुए थे.
तब रणनीतिक बैठकों में गोलाबारूद को लेकर चिंताजनक तथ्य रखे गए थे. उसके बाद सेना ने क्रिटिकल रणनीतिक कमियों को दूर करने के लिए प्रोक्युर्मेंट शुरू किया. साथ ही ‘15-20 दिन तक चलने वाले गहन युद्ध’ के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाया. ये चीन, पाकिस्तान और आतंकी घुसपैठ की तरफ से पेश खतरों से निपटने के लिए किया गया.
सेना के सूत्र ने बताया, ‘गोलाबारूद की कमी को बहुत हद तक पूरा कर लिया गया है.’
सूत्रों ने बताया कि वाइस चीफ्स को दिए आपातकालीन अधिकार के तहत 11,000 करोड़ रुपये की प्रोक्युर्मेंट में से 95% पूरी हो चुकी है. आपातकालीन अधिकार के तहत गोलाबारूद के लिए 7000 करोड़ के 30 अतिरिक्त कॉन्ट्रेक्ट्स पर दस्तखत किए जा चुके हैं.
सेना की ओर से पहले किए गए आकलन के मुताबिक टैंकों और आर्टिलरी गन्स के लिए 46 किस्म के गोलाबारूद, दस तरह के हथियारों, युद्ध सामग्री और माइन्स के लिए स्पेयर्स (कलपुर्जे) करीब 40,000 करोड़ रुपये में खरीदे जाने थे. सरकार ने फैसला किया था कि सेना जब भी निर्णायक उपकरण खरीदने की ज़रूरत समझे तो ये अधिकार सेना के पास ही रहना चाहिए