नागरिकता संशोधन एक्ट को लेकर देश भर में प्रदर्शन जारी है. वहीं नॉर्थ ईस्ट में इस एक्ट को लेकर काफी ज्यादा विरोध देखा जा रहा है. इसके मद्देनजर अब गृह मंत्री अमित शाह का शिलॉन्ग दौरा रद्द कर दिया गया है. इस रविवार को अमित शाह को नॉर्थ ईस्ट पुलिस अकादमी जाना था.
बांग्लादेश के गृहमंत्री ने भी भारत दौरा रद्द किया
बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए.के. अब्दुल मोमिन के बाद अब बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमान खान कमाल ने अपना भारत दौरा रद्द कर दिया है. असदुज्जमान ने यह कदम भारत में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रदर्शन के मद्देनजर उठाया है. असदुज्जमान का मेघालय दौरा निर्धारित था. वह सिलहट के तामबिल बॉर्डर के जरिए शुक्रवार को मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा के निमंत्रण पर दौरा करने वाले थे.
इससे पहले बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए.के. अब्दुल मोमिन ने 14 दिसंबर को बौद्धिक दिवस और 16 दिसंबर को विजय दिवस के पहले अपने व्यस्त कार्यक्रम का हवाला देते हुए अपनी यात्रा को रद्द कर दिया. उनका कथित नई दिल्ली का 3 दिवसीय दौरा 12 से 14 दिसंबर तक निर्धारित था. वह इंडियन ऑशन डॉयलाग और अपने भारतीय समकक्ष एस.जयशंकर के साथ वार्ता करने वाले थे.
जापानी प्रधानमंत्री ने भारत दौरा भी रद्द
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अपनी भारत यात्रा टाल दी है. जापान के जिजी प्रेस के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गई है. आबे की यात्रा रविवार से शुरू होने वाली थी. आबे 15 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले थे. दोनों नेताओं की बैठक असम के गुवाहाटी में होनी थी, जहां फिलहाल विवादास्पद नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को कहा था, "हमारे पास साझा करने के लिए कोई अपडेट नहीं है." विदेश मंत्रालय ने हालांकि गुरुवार को कहा था कि नागरिकता संशोधन कानून के पारित होने और यह यात्रा रद्द होने के संबंध में लगाई जा रही अटकलें अनुचित हैं.
असम के डिब्रूगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया गया है. सेना और सुरक्षा बलों ने गुवाहाटी शहर में फ्लैग मार्च को जारी रखा है, जिससे शुक्रवार को पांच घंटे तक शांत माहौल देखने को मिला. सुरक्षाबलों के फ्लैग मार्च से एक दिन पहले ही कानून के विरोध में हो रहे हिंसक प्रदर्शन में दो व्यक्ति मारे गए थे.
कानून के अनुसार, हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग, जो 31 दिसंबर, 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने के बाद भारत आए हैं, उन्हें अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी.