गायत्री मंत्र के माध्यम से दुनिया के करीब छह करोड़ लोगों को आध्यात्मिक चिंतन से सराबोर करने वाली संस्था ‘शांतिकुंज’ ने वर्ष 2011 के दौरान पूरे देश में हरित क्रांति लाने के उद्देश्य के तहत एक करोड़ वृक्ष लगाने की अनूठी योजना शुरू की है.
इस योजना के प्रभारी राममहेश मिश्र ने विशेष बातचीत में बताया कि शांतिकुंज के संस्थापक आचार्य श्रीराम शर्मा के जन्म शताब्दी वर्ष 2011 के दौरान संस्था द्वारा देश भर में एक करोड़ पौधे लगाने के संकल्प के साथ इस योजना की शुरुआत की जा चुकी है और अब तक करीब 10 लाख पौधे लगाये जा चुके हैं.
उन्होंने कहा कि इस योजना का नाम ‘वृक्ष गंगा अभियान’ रखा गया है और इसके तहत पर्यावरण संरक्षण आन्दोलन को एक नयी दिशा दी गयी है. इस योजना को मूर्त रूप देने के लिये गत दिनों हरिद्वार में एक नर्सरी की शुरुआत की गयी, जिसमें एक लाख पौधे एक साथ तैयार किये जाने की व्यवस्था की गयी है.
मिश्र ने बताया कि पूरे देश में फैली शांतिकुंज से सम्बद्ध संस्थाओं और योग आश्रमों में आने वाले लोगों द्वारा किये जाने वाले कई प्रकार के संस्कारों तथा प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आवश्यक रूप से एक पौधा दिया जा रहा है, जिसका वे अपने क्षेत्र में रोपण करेंगे.
मिश्र ने बताया कि शांतिकुंज की संचालिका शैलदीदी ने गत दिनों प्रमुख रूप से आंवला, शमी तथा चंदन के पौधों वाली नर्सरी का शुभारंभ किया, जिसमें एक लाख पौधे एक साथ तैयार किये जायेंगे. इस नर्सरी में आचार्य श्रीराम शर्मा के जन्मस्थान आगरा के आंवलखेडा से लायी गयी विशेष मिट्टी का प्रयोग किया गया है.
उन्होंने बताया कि इस अभिनव योजना के तहत उत्तराखंड से देश भर में वृक्षारोपण के लिये पौधों की आपूर्ति पूरे वर्ष की जायेगी. शुरुआती तौर पर अहमदाबाद, लखनऊ, रांची, चमोली, रायपुर, पटना तथा दिल्ली स्थित गायत्री संगठनों में पौधों की आपूर्ति की गयी है और वृक्षारोपण का काम शुरू किया जा चुका है.
मिश्र ने बताया कि पूरे वर्ष तक चलने वाले इस वृक्ष गंगा अभियान में देश के कोने कोने में मुख्यरूप से आंवला, चंदन और शमी के वृक्ष लगाये जायेंगे जो न केवल लोगों को आर्थिक रूप से समृद्धि प्रदान करने वाले होंगे बल्कि आध्यात्मिक शांति का कारण भी बनेंगे.
उन्होंने कहा कि अनुसंधान के आधार पर यह निष्कर्ष आया है कि एक वृक्ष अपने पचास वर्ष के जीवनकाल में कुल मिलाकर करीब एक करोड़ रुपये का अनुदान लौटाता है. इसमें प्राणरक्षक वायु आक्सीजन, प्रदूषण नियंत्रण, भूमि को क्षरण से बचाना, जल संरक्षण, पशु पक्षियों का संरक्षण, चारा, फल, और लकड़ी तथा अन्य सहयोग शामिल हैं.
मिश्र ने बताया कि जंगलों में लगने वाली आग तथा वृक्षों की कटाई से पृथ्वी पर ही संकट आ गया है इसलिये वृक्षारोपण आज की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है. शांतिकुंज के व्यवस्थापक मिश्र ने बताया कि अकेले शांतिकुंज में ही प्रतिवर्ष कई लाख श्रद्धालुओं का आना होता है.
संस्था ने यह तय किया है कि प्रत्येक आने वाले श्रद्धालु को विदाई के समय एक पौधा दिया जायेगा जिसका वे अपने अपने इलाकों में न केवल रोपण करेंगे बल्कि उसके संरक्षण और संवद्ध्र्रन का भी जिम्मा लेंगे. प्रत्येक श्रद्धालु उस पेड़ को अपनी संतान की तरह पालेगा और रक्षा करेगा. उन्होंने बताया कि यह संकल्प उस श्रद्धालु से शांतिकुंज से विदा होते समय ही करा लिया जायेगा ताकि वह अपने संकल्प के आधार पर उस वृक्ष की पूरी हिफाजत करे.
मिश्र के अनुसार, उनकी संस्था के इस अभिनव अभियान में उत्तर प्रदेश वन विभाग ने भी सहयोग करना शुरू कर दिया है. वनाधिकारी एसोसियेशन के अध्यक्ष गोपाल ओझा ने घोषणा की है कि उत्तर प्रदेश के सभी 72 जिलों में गायत्री परिवार को वन विभाग द्वारा पौधे उपलब्ध कराये जायेंगे.
उन्होंने बताया कि आंवला तथा शमी के अलावा आगामी दिनों में नर्सरी में केला, नीम, वट, पीपल सहित अधिक आक्सीजन देने वाले वृक्षों के लिये पौधों को तैयार किया जायेगा, जिससे इस देश को अधिक से अधिक प्राणवायु (आक्सीजन) मिल सके और पर्यावरण प्रदूषण को रोका जा सके.
मिश्र ने बताया कि आंवले का आध्यात्मिक महत्व तो है ही साथ ही यह जीवन रक्षक और स्वास्थ्यवर्धक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल होता है. शांति कुंज की संस्थाओं में भारी संख्या में आंवले के पौधे भी लगाये जा रहे हैं.