वैज्ञानिकों ने बंदरों को दिमाग की क्षमता से कम्प्यूटर गेम खेलना सिखाया है और उनका दावा है कि इस सफलता का उपयोग लकवाग्रस्त रोगियों के फायदे में किया जा सकता है.
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अमेरिका के डर्हम के ड्यूक यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर न्यूरोइंजीनियरिंग के एक दल ने दो बंदरों को दिमाग की क्षमता से एक कम्प्यूटर गेम के वर्चुअल आर्म्स को चलाना सिखाया.
ये जानवर कम्प्यूटर की इन वस्तुओं को उनके रंग-रूप को देखकर भेद कर पाने में सक्षम थे.
डेली टेलीग्राफ की खबर में बताया गया कि अनुसंधानकर्ताओं को उम्मीद है कि उनकी खोजों से ‘रोबोटिक एक्जोस्केलेटन’ बनाने का रास्ता खुलेगा जिसे लकवाग्रस्त रोगी पहन सकेंगे और उन्हें दिमागी तरंगों के इस्तेमाल से आसपास की दुनिया के अनुभव में मदद मिलेगी.