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भारतीय धनकुबेरों पर लंदन के बिल्डरों की नजर

ब्रिटेन के आवास बाजार के लगातार मंदी की गिरफ्त में रहने के चलते लंदन के सबसे बड़े बिल्डर अब भारत के आसामियों पर डोरे डाल रहे हैं. उनके ग्राहकों में भारतीयों का औसत हिस्सा अच्छे खासे स्तर पर पहुंच गया है.

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ब्रिटेन के आवास बाजार के लगातार मंदी की गिरफ्त में रहने के चलते लंदन के सबसे बड़े बिल्डर अब भारत के आसामियों पर डोरे डाल रहे हैं. उनके ग्राहकों में भारतीयों का औसत हिस्सा अच्छे खासे स्तर पर पहुंच गया है.

आवास उद्योग के सूत्रों ने कहा कि पिछले साल लंदन में प्रत्येक 20 लाख पौंड में बिके मकानों के खरीदार विदेशी रहे. विदेशियों द्वारा लंदन में मकान खरीदने से स्थानीय लोगों में यह भावना घर कर गई है कि इससे मकानों के दाम कृत्रिम रूप से उंचे बने रहेंगे जिससे ब्रिटेन के खरीदारों के लिए आवास बाजार में घुसना मुश्किल होगा.

उल्लेखनीय है कि आसान पहुंच, स्थायित्व, सुरक्षित एवं विश्वस्तरीय वित्तीय संस्थानों की मौजूदगी के चलते लंदन विश्वभर के मालदार लोगों का पसंदीदा स्थान रहा है. यही वजह है कि दुनियाभर के ज्यादातर अरबपति लंदन में बसते हैं.

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लंदन के सबसे बड़े बिल्डर बार्केले ग्रुप ने कहा कि पिछले साल उसने 2,000 मकान 2,63,000 पौंड के औसत मूल्य पर बेचे. इनमें 30 प्रतिशत से भी अधिक मकानों के खरीदार चीन और भारत के थे. एक अन्य बिल्डर बैरेट डेवलपमेंट्स ने लंदन में 750 मकानों में से एक तिहाई मकान इस साल कथित तौर पर एशियाई ग्राहकों को बेचने की योजना बनाई है.

बैरेट के बिक्री निदेशक गैरी पैट्रिक ने कहा कि उनके (एशियाई लोगों) पास काफी नकदी है जो स्थानीय खरीदारों के पास नहीं है. उल्लेखनीय है कि लंदन में पहले ही 23 अरबपति रहते हैं जिनमें 11 अरबपति विदेशी मूल के हैं. इनमें इस्पात किंग लक्ष्मी निवास मित्तल और वेदांत रिसोर्सेज के प्रमुख अनिल अग्रवाल शामिल हैं.

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