मध्य प्रदेश विधानसभा में भ्रष्टाचार पर चर्चा कराए जाने की मांग को लेकर अध्यक्ष के आसन पर पहुंच कर हंगामा व छीना-झपटी करने के आरोप में कांग्रेस के दो विधायकों की सदस्यता बुधवार को समाप्त कर दी गई. सात विधायकों को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया गया है.
कांग्रेस ने सरकार व विधानसभा अध्यक्ष पर तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया.
कांग्रेस विधायकों ने मंगलवार को विधानसभा में भ्रष्टाचार पर चर्चा कराने की मांग को लेकर हंगामा किया था. इस दौरान पीठासीन अधिकारी ज्ञान सिंह से अभद्रता भी की गई थी. इस मसले को भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को सदन में उठाया और इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताया.
संसदीय कार्य मंत्री नरोत्तम मिश्र ने कांग्रेस विधायक चौधरी राकेश सिंह व कल्पना पारुलेकर को सदन से निष्कासित कर उनकी सदस्यता समाप्त करने का प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.
दो विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के साथ ही कांग्रेस के सात विधायकों लाखन सिंह यादव, रामनिवास रावत, पुरुषोत्तम दांगी, इमरती देवी, नारायण प्रजापति, आरिफ अकी, विजेंद्र सिंह मालाहेडा को विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे दिया गया है और मामला जांच समिति को सौंप दिया गया है.
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष रोहाणी ने विधानसभा की कार्रवाई अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया.
संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्र ने कहा है कि विपक्ष के विधायकों का आचरण परम्परा व लोकतंत्र की मान्यताओं को तार-तार कर देने वाला है. लोकतंत्र को बचाए रखना है तो कड़े निर्णय लेने होंगे.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के दो विधायकों ने मंगलवार को जो आचरण किएं, वह निंदनीय है और अगर उनके खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाया जाता तो इतिहास हमें माफ नहीं करता.
दो विधायकों की सदस्यता खत्म किए जाने को नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने तानाशाहीपूर्ण फैसला करार देते हुए कहा है कि विधानसभा के इतिहास में इस घटना को काले अक्षरों में लिखा जाएगा. उन्होंने कहा कि यह निर्णय सरकार व विधानसभा अध्यक्ष ने मिलकर दूसरे पक्ष की बात सुने बगैर लिया है, जो नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है.
विधानसभा सत्र के तीसरे दिन सुबह कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस ने एक बार फिर भ्रष्टाचार पर चर्चा कराने का मुद्दा उठाया. कांग्रेस की मांग पर अध्यक्ष ईश्वर दास रोहाणी ने प्रश्नकाल को स्थगित कर दिया.
सदन की दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायक अपनी मांग को दोहराते हुए विधानसभा अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे. एक तरफ कांग्रेस की नारेबाजी चलती रही, दूसरी तरफ अनुपूरक बजट तथा तमाम संकल्पों को पारित करने का सिलसिला चलता रहा.
दूसरे दिन सदन में हुए हंगामे को देखते हुए बुधवार को सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे. हाल यह था कि मुख्यमंत्री, मंत्री व नेता प्रतिपक्ष के अलावा कोई भी विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में नहीं जा सकता था. विधायकों को भी मुलाकात के लिए विधानसभा अध्यक्ष से अनुमति लेने की जरूरत पड़ी. पत्रकारों को भी विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष तक जाने से रोका गया.