बिहार में राज्य निर्वाचन आयोग जल्द ही हाई टेक हो जाएगा क्योंकि सभी को मताधिकार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयोग ने पंचायत तथा नगर निकाय चुनाव में ई वोटिंग प्रक्रिया को अपनाने का निर्णय किया है. राज्य निर्वाचन आयुक्त एच.सी. सिरोही ने बताया कि आयोग अत्याधुनिक प्रक्रिया (ई-वोटिंग) को अपनाने की प्रक्रिया में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
ई-वोटिंग के तहत एक अत्याधुनिक चिप युक्त मतदाता पहचान पत्र भी जारी किया जाएगा और आयोग के पास उपलब्ध ईवीएम मशीनों का सॉफ्टवेयर उन्नत किया जाएगा. ई वोटिंग के लिए मशीनें अब कार्ड रीडर युक्त होंगी इससे एक व्यक्ति का एक ही बार मतदान सुनिश्चित होगा.
उन्होंने बताया कि आयोग ने ऐसी मशीनों से भी मतदान का निर्णय किया है जिन्हें रेलवे, बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर कियोस्क के रूप में स्थापित किया जाएगा. मतदाता अपने ई वोटिंग कार्ड की मदद से मतदान कर पायेंगे. इसके अलावा मोबाइल फोन नंबर रजिस्ट्रेशन के माध्यम से भी एक विशेष (यूनिक) नंबर प्रदान करने पर विचार किया जा रहा है जिससे मतदान सुरक्षित हो सके.
बिहार निर्वाचन आयोग राज्य में पंचायत और नगर निकाय के चुनाव को संपन्न कराता है. राज्य में ग्राम पंचायतों, पंचायती राज संस्थाओं, नगर पालिका, नगर निगम और जिला परिषद के चुनाव संपन्न कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकार के पास है.
सिरोही ने बताया कि आयोग की इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, बेंगलूर में तैयार होती हैं. परंपरागत ईवीएम को ई-वोटिंग के रूप में तब्दील करने के लिए उसमें विशेष सॉफ्टवेयर डालने होंगे ताकि वह चिप युक्त ई-वोटिंग मतदाता कार्ड को पढ़ सकें और मोबाइल फोन से अनूठे नंबरों को भी स्वीकार कर सकें. इसके लिए बीइएल बेंगलूर के अधिकारियों से बातचीत हो गयी है. उन्होंने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग के संयुक्त सचिव अहिभूषण पांडेय के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एक दल बेंगलूर जाएगा. यह दल अपनी जरूरतों से बीईएल को अवगत कराएगा.
निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि तीन चार महीने के भीतर ई-वोटिंग के लिए जरूरतें पूरी कर ली जाएंगी और इसे प्रयोग के तौर पर दानापुर में नगर परिषद वार्ड संख्या 40 में आजमाया जायेगा. सिरोही ने बताया कि आयोग के पास 63 लाख शहरी मतदाता हैं और इन्हें ई वोटिंग कार्ड उपलब्ध कराये जाएंगे. इसके बाद ग्रामीण मतदाताओं पर ध्यान जाएगा.
बिहार के शहरी निकायों के चुनाव मई 2012 में संपन्न हुए हैं जबकि पंचायतों के चुनाव 2011 में संपन्न हुए थे. आयोग का मानना है कि वोटिंग की अत्याधुनिक प्रक्रिया को अपनाने से मतदान करना सुगम हो जाएगा. फर्जी मतदान पर रोक लगाने में भी इससे सहायता मिलेगी.
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, गुजरात के नगरपालिका चुनाव में ई-वोटिंग का प्रयोग अपनाया जा चुका है, जबकि मुंबई में बीएमसी चुनाव में प्रयोग के तौर पर इसे लागू करने की प्रक्रिया चल रही है. मुंबई में ई-वोटिंग का प्रयोग स्मार्ट वोटिंग के नाम से चल रहा है. सिरोही ने कहा कि ई-वोटिंग कार्ड के लिए मतदाताओं से 10 या 15 रुपये का मामूली शुल्क लिया जाएगा. राष्ट्रीय चुनाव आयोग के फोटोयुक्त मतदाता कार्ड (इपिक) की तरह बिहार राज्य निर्वाचन आयोग का ई-मतदाता कार्ड भी बहुद्देश्यीय होगा और आधिकारिक दस्तावेज के रूप में मान्य होगा. इलेक्ट्रानिक चिप में कई प्रकार की जानकारियों का समावेश किया जाएगा. एक प्रकार से यह इपिक का उन्नत संस्करण होगा.
उन्होंने कहा कि ई-वोटिंग पर व्यापक विचार मंथन का दौर चल रहा है. इसके लिए सचिव स्तर के सेवानिवृत्त या अन्य गणमान्य लोगों का समूह तैयार किया गया है. सदस्यों के नाम का चयन किया जा चुका है. यह एक थिंक टैंक के रूप में काम करेगा. आयोग का कहना है कि नई पद्धति से निर्वाचन के लिए बिहार नगरपालिका निर्वाचन नियमावली 2007 और बिहार पंचायत निर्वाचन नियमावली 2006 में संशोधन का प्रस्ताव भी राज्य सरकार को भेजा जाएगा. निर्वाचन आयोग की टीमें महाराष्ट्र और गुजरात का भी दौरा कर जानकारी लेंगी.