जिस सीडी के दम पर टीम अन्ना के सदस्य शांति भूषण और प्रशांत भूषण पर दाग़ लगाने की कोशिश की गई वो सीडी फ़र्ज़ी निकली. हालांकि दिल्ली की फ़ोरेंसिक लैब और दिल्ली पुलिस की सीईआरटी लैब इस सीडी को ओरिजनल बता चुके हैं लेकिन चंडीगढ़ लैब की रिपोर्ट कई सवाल खड़े कर रही है.
चंडीगढ़ की लैब ने साफ़ कहा है कि ये सीडी छेड़छाड़ कर के तैयार की गई है. इसमें कई आवाज़ों को मिलाने के लिए कंप्यूटर पर नॉन लीनियर एडिटिंग की गई है. एडिटिंग में गोल्डवेव, अडोब ऑडिशन और मल्टीस्पीच सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया.
रिपोर्ट कहती है कि ये सीडी 17 अप्रैल 2011 को तैयार की गई लेकिन उसमें एक साउंड क्लिप जोड़ी गई है जिसे 15 अप्रैल को ही तैयार किया गया था. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस सीडी को बेहद चतुराई से एडिट किया गया है. आवाज़ों के सिग्नल बार-बार बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं. कई जगह बोले गए वाक्य भी अटपटे लग रहे हैं तो कई जगह बातचीत का मुद्दा भी अजीब लग रहा है. कुछ शब्द बीच-बीच में जोड़े हुए नज़र आ रहे हैं और बैकग्राउंड में कई आवाज़ें भी सुनाई दे रही हैं.
प्रशांत भूषण इस रिपोर्ट का सहारा लेते हुए दिल्ली की फ़ोरेंसिक लैब और दिल्ली पुलिस की सीईआरटी लैब पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं.