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राजस्थान: करौली में 3000 गाय भूख-प्यास और बीमारी से मरने की कगार पर

राजस्थान के करौली में 3000 गाय मरने को मजबूर हैं. भूख, प्यास और बीमारी से तड़पकर करीब 250 पहले ही गाये मर चुकी हैं और कुछ की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है. सत्ताधारी वसुंधरा राजे सरकार मौन है.

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भूख, प्यास से मरने को मजबूर गाय
भूख, प्यास से मरने को मजबूर गाय

राजस्थान के करौली में 3000 गाय मरने को मजबूर हैं. भूख, प्यास और बीमारी से तड़पकर करीब 250 गायें पहले ही यहां दम तोड़ चुकी हैं जबकि कई की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है. भूख से तड़पकर मरी कई गायों के पेट से पॉलीथीन निकली हैं, जो बताती हैं कि हालात कितने खतरनाक हैं. लेकिन उस प्रदेश में जहां गोरक्षा के नाम पर जान तक ले लेने की घटनाएं आम हैं, वहां इन मरती गायों की सुध लेने वाला कोई नहीं है.न तो वसुंधरा सरकार और न ही सामाजिक-राजनीतिक संगठन.

250 गाय मर चुकी हैं

करीब 14 किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में पिछले छह साल से इन गायों की देखभाल इलाके का एक मीणा परिवार कर रहा है. लेकिन इस परिवार की कमाई इतनी नहीं है कि वो बिना सरकारी और गैर-सरकारी मदद से इन्हें पाल सके. मीणा परिवार ने कई बार सरकारी दफ्तरों में गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. कई एनजीओ से भी संपर्क साधा पर मदद को कोई सामने नहीं आया. थक हार कर ये परिवार अपने जिम्मे इन गायों को बचाने की कोशिशों में जुट गया.आजतक से खास बातचीत में प्रकाशी मीणा ने कहा कि 'उनकी और उनके परिवार की पूरी कोशिश है कि वो इन गायों की सही तरीके से देखभाल हो सके. इसके लिए वो कड़ी मेहनत कर रही हैं.'

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3000 गायों का पेट कैसे भरेगा?

गांव से चंदा और कुछ पैसा उधार लेकर इन गायों की देखरेख की जा रही है. लेकिन अब चारा भी खत्म होता जा रहा है. कहीं से किसी तरह की मदद नहीं मिल रही. ऐसे में गाय भूखी रहने को मजबूर हैं. कड़ाके की ठंड और तपती गर्मी में हालात और भी ज्यादा खराब हो जाते हैं. सबसे बड़ी समस्या सर्दियों के मौसम में दवाओं की है. सर्दियों में शेड की कमी के कारण गायों को बाहर रहना पड़ रहा है, जिससे वो बीमार हो रही हैं. दवाओं और पैसों की कमी के कारण उनका इलाज नहीं हो पा रहा है. 'प्रकाशी मीणा का कहना है कि भले ही सरकार और प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है लेकिन इससे वो हिम्मत नहीं हारने वाली हैं. गायों को बचाने के लिए उनका परिवार किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ेगा.'

सरकार नहीं कर रही है मदद

गोरक्षा के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली केंद्र और राज्य सरकार को गायों की रक्षा के लिए आगे आना होगा और अपनी योजनाओं को सख्ती के साथ लागू करना होगा. तभी इन गायों को बचाया जा सकता है.

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