प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16 जनवरी को बाड़मेर में रिफाइनरी का शिलान्यास करने जा रहे हैं. सोनिया गांधी 2013 में इस रिफाइनरी का इसी जगह शिलान्यास कर चुकी हैं. इसे लेकर कांग्रेस मोदी पर हिंदू कार्ड से हमला बोल रही है.
इस सबसे अलग बाड़मेर में बीजेपी सरकार की नींद उड़ा देने वाली राजनीति देखने को मिली, जब एक निर्दलीय विधायक की आवाज पर लाखों लोग बेरोजगारी, फसल ऋण माफी और सशक्त लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए रैली में पहुंचे. लोग ट्रेनों के अंदर और छतों पर बैठकर पहुंचे.
गुजरात में जातीय आधार वाले तीन नेताओं हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवाणी और अल्पेश ठाकोर की राजनीति के बाद अब राजस्थान में लोगों के गुस्से को जातीय जनाधार वाले नेता भुना रहे हैं. लाखों की भीड़ किसी पार्टी की नहीं बल्कि खींवसर के निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल की रैली के लिए जुटी.
जाटों की ये भीड़ बीजेपी की वसुंधरा सरकार के लिए बेचैन करने वाली है. जसवंत सिंह के साथ किए व्यवहार से राजपूत पहले से नाराज हैं और अब जाटों की भीड़ भी बीजेपी के लिए संकट पैदा कर सकती है. बेरोजगारी और किसानों की कर्ज माफी जैसे मुद्दों पर ये भीड़ जुटी है. हनुमान बेनीवाल ने बीजेपी को ललकारा कि मेरी इतनी भीड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी रैली में जुटाकर दिखाएं.
इस सबसे अलग बाड़मेर में सपने दिखाने की अलग राजनीति चल रही है. 2013 में विधानसभा चुनाव से पहले गहलोत सरकार ने सोनिया गांधी को बुलाकर तेल रिफाइनरी का शिलान्यास करवाया था. वसुंधरा राजे ने सत्ता में आते ही इसे घाटा का सौदा बताकर बंद कर दिया. अब 2018 में विधानसभा चुनाव है तो वसुंधरा राजे ने 16 जनवरी को फिर से शिलान्यास करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुलाया है.
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस मामले पर बीजेपी पर उन्हीं के हिंदू कर्म-कांड का हवाला देकर कह रहे हैं कि एक जगह हुए मंत्रोच्चार के कार्यक्रम को रद्द कर उसी जगह पूजा करना ठीक नहीं है.
गहलोत ने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी है कि ये आपके लिए शिलान्यास की हुई योजना का शिलान्यास करने आना सम्मानजनक नहीं है. जबकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी कहते हैं कि कांग्रेस ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम से महंगा करार किया था. आप नहीं आए. चुनावी साल में रिफाइनरी का शिलान्यास कांग्रेस को भी सियासी फायदा नहीं दिया था ऐसे में बीजेपी को देगी इसमें संदेह लग रहा है.