राजस्थान के धौलपुर जिला कलेक्टर की पहल पर अब राजस्थान के सभी जिलों में ई-मित्रों के माध्यम से सरकारी अस्पतालों के पर्चे बन सकेंगे. ई-मित्र केंद्रों में रोगी पर्ची पंजीकरण का कोरोना काल में काफी फायदा मिला है. जिसके कारण अस्पताल में आने वाले ज्यादातर मरीजों ने अस्पताल की ओपीडी में बिना लाइन में लगे ई-मित्र के माध्यम से पर्चे बनवाई और सीधे डॉक्टर से इलाज कराया.
जिला कलेक्टर जायसवाल का कहना है कि पहले मरीजों को सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में पर्चा बनवाने के लिए लंबी-लंबी लाइनों में लगना पड़ता था. महिलाओं और बुजुर्गों को काफी दिक्कतों का समाना करना पड़ता था. इस समस्या को ध्यान में रखकर लाइन कैसे कम की जाए यह प्लान बनाया गया. ई-मित्र केंद्रों में से मरीजों और उनके परिजनों को काफी फायदा पहुंच रहा है और अस्पताल प्रबंधन को भी भीड़ से मुक्ती भी मिली है.
ई-मित्र केंद्रों से बनेगी मरीजों की पर्ची
अब इस नई व्यवस्था से रोगियों को पर्ची बनवाने के लिए जाने की भी जरूरत नहीं पड़ती है. इसके लिए जिला कलेक्टर द्वारा सभी ई- मित्र केंद्रों को प्री- प्रिंटेड स्टेशनरी और डॉट मैट्रिक्स प्रिंटर दिए गए हैं. वर्तमान नियमों के तहत रोगियों की पर्ची एक सप्ताह के लिए मान्य होती हैं. लेकिन इस अवस्था में किसी भी मरीज द्वारा 7 दिन पूर्व कभी भी निकटतम ई- मित्र केंद्र पर पर्ची बनाई जा सकती है. इससे अस्पताल प्रबंध को 6 लाख 62 हजार रुपये प्रति वर्ष का वित्तीय भार भी कम हुआ है.
ई-मित्र केंद्रों द्वारा ओपीडी रजिस्ट्रेशन पर्ची विषय पर ट्रेनिंग का आयोजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिग के जरिये से किया गया था. जिसमें राजस्थान के समस्त 33 जिलों के अधिकारियों को जिला कलेक्टर जायसवाल ने इस मॉडल के लागू करने की प्रक्रिया के बाबत जानकारी दी.
सरकारी अस्पतालों से लाइनें खत्म होंगी
धौलपुर जिले में इस प्रयोग की सफलता के बाद अब पूरे राजस्थान प्रदेश में ई मित्र केंद्रों पर आउटडोर पर्ची बनाने की कवायद शुरू हो गई है. इस नई व्यवस्था को एक अप्रैल 2020 से 33 जिलों में लागू होना था. लेकिन कोरोना वायरस की वजह से इसमें देरी हुई. जानकार मान रहे हैं कि देशभर के सरकारी अस्पतालों में इस मॉडल लागू कर दिया जाए तो इससे मरीजों को काफी फायदा पहुंचेगा.