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दलित दूल्हे के घोड़ी चढ़ने पर ऐतराज, पुलिस सुरक्षा में निकली बारात

देश आज चाहे कितना भी डिजिटल हो गया हो, लेकिन गांवों में जाति-पाति और छुआछूत जैसी परंपरा चली आ रही हैं. ऐसे समय में आज भी दलितों को शादी में घोड़ी पर बैठने पर ऐतराज किया जाता है.

पुलिस सुरक्षा में दलित दूल्हे की बारात पुलिस सुरक्षा में दलित दूल्हे की बारात

  • दबंगों की धमकी से डरकर दलित परिवार पहुंचा था पुलिस के पास
  • प्रशासन ने विभिन्न समाजों के साथ बैठक की, पुलिस तैनात रही

देश आज चाहे कितना भी डिजिटल हो गया हो, लेकिन गांवों में जाति-पाति और छुआछूत जैसी परंपरा चली आ रही है. ऐसे समय में दलितों को आज भी शादी में घोड़ी पर बैठने पर ऐतराज किया जाता है.

ऐसा ही मामला राजस्थान के अलवर में बानसूर में आया है जहां बुटेरी गांव में दलित दूल्हे की बारात पुलिस प्रशासन और बानसूर प्रशासन की देखरेख में निकाली गई. चार दिन पूर्व दलित समाज के लोगों ने बानसूर उपखंड अधिकारी राकेश मीना को ज्ञापन देकर सुरक्षा की मांग की थी.

उनका आरोप था कि गांव में दूल्हे को घोड़ी पर चढ़ने से दबंगों को ऐतराज है. गांव में कुछ दबंग लोगों से भयभीत होकर दलित समाज के ग्रामीणों ने एसडीएम से पुलिस सुरक्षा की गुहार लगाई थी.

बाद में प्रशासन ने ग्रामीणों और सभी समाज के लोगों को समझाया. उसके बाद भी प्रशासन अलर्ट रहा. सुबह गांव बुटेरी में बानसूर, हरसौरा, बहरोड और ततारपुर से पुलिस टीम को बुलाया गया. बुधवार को बानसूर एसडीएम राकेश मीणा, तहसीलदार जगदीश बैरवा, बहरोड सीओ अतुल साहू ग्राम बुटेरी पहुंचे थे. यहां विभिन्न समाजों के लोगों के साथ बैठक कर शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की थी. इसके चलते गुरुवार को निकासी में किसी तरह का खलल नहीं पड़ा.

वहीं सुरक्षा को लेकर बहरोड डीएसपी अतुल शाहू और तहसीलदार जगदीश बैरवा भी मौके पर पहुंचे. पुलिस सुरक्षा के बीच में शाम को दलित दूल्हे की बिंदोरी (बारात) निकाली गई. जिससे पूरा गांव छावनी में तब्दील हो गया. दूल्हे के आगे बाराती नाच रहे थे और पुलिस की गाड़ी बारत केआगे और पीछे चलती नजर आई. हथियार बंद जवान दूल्हे के आगे-पीछे चलते नजर आए.

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