सतलोक आश्रम मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे रामपाल को शुक्रवार को हिसार की सेंट्रल जेल-2 से रिहा कर दिया गया. करीब 11 साल 4 महीने और 24 दिन जेल में बिताने के बाद वो बाहर आए. यह रिहाई उसे देशद्रोह के मामले में जमानत मिलने के बाद मिली है.
बताया गया कि 8 अप्रैल को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रामपाल को देशद्रोह के केस में जमानत मंजूर की थी. इसके बाद अदालत के आदेश के अनुसार रामपाल के वकीलों ने हत्या के दो मामलों में 5-5 लाख रुपये के बेल बॉन्ड जमा कराए. सभी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें शुक्रवार को जेल से रिहा किया गया.
परिवार सात गाड़ियों के काफिले में लेने पहुंचा
रामपाल की रिहाई के समय उसके परिवार के सदस्य सात गाड़ियों के काफिले में जेल पहुंचे थे. जेल से बाहर निकलने के बाद वह सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर में बैठकर वहां से रवाना हुए. गाड़ी के शीशों पर सफेद पर्दे लगे हुए थे. बताया जा रहा है कि जेल से बाहर निकलते वक्त रामपाल के चहरे पर मुस्कान थी.
यह मामला नवंबर 2014 से जुड़ा है, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रामपाल को कोर्ट की अवमानना के एक मामले में पेश होने का आदेश दिया था. लेकिन वह अदालत में पेश नहीं हुआ. इसके बाद 19 नवंबर 2014 को पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए हिसार के बरवाला स्थित सतलोक आश्रम पहुंची.
आश्रम में पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव हो गया. इस दौरान हालात काफी बिगड़ गए और महिलाओं और बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस ने रामपाल को गिरफ्तार कर लिया था.
हिंसा में 6 लोगों की मौत के बाद 2018 में मिली थी उम्रकैद की सजा
बाद में 2018 में हिसार की अदालत ने रामपाल को इस मामले में दोषी ठहराया और हत्या सहित अन्य धाराओं में उम्रकैद की सजा सुनाई. इसके साथ ही उस पर देशद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया था. अब देशद्रोह के मामले में जमानत मिलने के बाद उसकी रिहाई हो गई है. हालांकि अन्य मामलों को लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रह सकती है.