पंजाब में 5 मई 2026 की रात कुछ ही घंटों के भीतर दो IED विस्फोट हुए. ये धमाके जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय और अमृतसर के खासा मिलिट्री कैंप के पास हुए. इन घटनाओं के बाद पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. सीमावर्ती इलाकों और रक्षा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. शुरुआती जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि इसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की साजिश हो सकती है.
पंजाब के DGP गौरव यादव ने इसे पंजाब में अशांति बनाए रखने की ISI की एक साजिश करार दिया है. 10 दिनों से भी कम समय में हुए तीन धमाकों की यह शृंखला, जिसमें 27 अप्रैल को पटियाला रेलवे ट्रैक पर IED लगाने की कोशिश भी शामिल है. सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों को उजागर करती है.
गहन पड़ताल से यही पता चलता है कि पंजाब में 'हाइब्रिड' आतंकी-गैंगस्टर घटनाओं की एक लहर सी आ गई है, जिसमें ISI-समर्थित मॉड्यूल, निचले स्तर के स्थानीय गुर्गे और खालिस्तानी चरमपंथी शामिल हैं. पहले गुरदासपुर में पुलिसकर्मियों की हत्या (फरवरी), भिंडी सैदां में ग्रेनेड हमला (मार्च), पटियाला रेलवे स्टेशन पर हमले की कोशिश (अप्रैल), और अब 5 मई को हुए दोहरे धमाके.
भले ही भगवंत मान के बयान से एक राजनीतिक घमासान छिड़ गया हो, लेकिन आजतक को जानकारी मिली है कि केंद्रीय एजेंसी ने जालंधर BSF कैंप के लिए एक अलर्ट जारी किया था, जिसमें 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' की पहली बरसी पर संभावित हमले की आशंका जताई गई थी. इसके कुछ ही घंटों बाद जालंधर स्थित BSF मुख्यालय में एक स्कूटी के पास हुए धमाके में BSF का एक जवान घायल हो गया, जिसकी जांघ में छर्रे लगने से चोट आई. 'खालिस्तान लिबरेशन आर्मी' (KLA) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है जबकि पंजाब पुलिस का मानना है कि यह संगठन एक सिख चरमपंथी संगठन है, जिसमें पाकिस्तानी गैंगस्टर शहज़ाद भट्टी भी शामिल है.
पुलिस के अनुसार, यह हमला 19 वर्षीय रंजीत सिंह की मौत का बदला लेने के लिए किया गया था. KLA ने इस हमले को 'ऑपरेशन नवा सवेर' नाम दिया है और इसे रंजीत सिंह की मौत का बदला बताया है. रंजीत सिंह की मौत 25 फरवरी, 2026 को पंजाब के गुरदासपुर में एक विवादित पुलिस मुठभेड़ के दौरान हुई थी. उस पर 22 फरवरी, 2026 को पंजाब पुलिस के दो जवानों की हत्या में शामिल होने का आरोप था.
बॉर्डर के पास पुलिसकर्मियों की हुई थी हत्या
पंजाब पुलिस के दो जवान ASI गुरनाम सिंह और होम गार्ड जवान अशोक कुमार की भारत-पाकिस्तान सीमा के पास एक चेकपोस्ट के अंदर ड्यूटी पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उनके हथियार इस्तेमाल नहीं हुए, जिससे यह एक सुनियोजित और अचानक हमला माना गया. पुलिस ने इसे ISI-समर्थित एक ऑपरेशन बताया, जिसे स्थानीय युवाओं ने ₹20,000 के बदले अंजाम दिया था. तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान नाम के एक छोटे संगठन ने पोस्टरों के जरिए इसकी जिम्मेदारी ली थी, लेकिन पुलिस ने इस दावे को खारिज कर दिया.
आरोपी रंजीत सिंह की मौत के बाद उसके परिवार और स्थानीय संगठनों ने इसे फर्जी मुठभेड़ बताया था. KLA ने पोस्टर जारी कर उसे शहीद बताया और आगे और हिंसा की धमकी दी, जिसमें कहा गया कि इतना खून बहाएंगे कि सब कुछ लाल हो जाएगा.
मार्च: पुलिस स्टेशन पर हमला
29-30 मार्च की आधी रात भारत-पाक बॉर्डर के पास अमृतसर के भिंडी सैदां पुलिस स्टेशन पर ग्रेनेड हमला. स्टेशन के बाहर कम तीव्रता का धमाका हुआ, जिसमें कोई घायल नहीं हुआ. KLA ने एक पोस्टर के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली और इसे रंजीत सिंह की मौत का बदला लेने के लिए चलाए गए 'ऑपरेशन नवा सवेर' का हिस्सा बताया. पुलिस ने अप्रैल के मध्य तक इस मामले को सुलझा लिया. एक संयुक्त अभियान में छह आरोपियों को गिरफ़्तार किया गया, उनके पास से पिस्तौलें बरामद की गईं और इस घटना का संबंध ISI-समर्थित एक मॉड्यूल से जोड़ा गया.
अप्रैल: रेलवे ट्रैक पर हमला
27-28 अप्रैल को पटियाला जिले में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेलवे ट्रैक पर IED धमाके की कोशिश हुई. रात में ट्रैक के पास कम तीव्रता का धमाका हुआ. डिवाइस लगाने वाले व्यक्ति की पहचान तरन तारन के जगरूप सिंह के रूप में हुई. विस्फोटक डिवाइस लगाते समय उसकी मौत हो गई. पुलिस ने इसे ISI से जुड़े एक खालिस्तानी आतंकी मॉड्यूल द्वारा धमाके की कोशिश बताया; इसके बाद कई गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें प्रदीप सिंह खालसा और अन्य लोग शामिल थे.
इससे पहले 9 अप्रैल और 16 अप्रैल को अमृतसर/गुरदासपुर में BKI के बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें हथगोले, IED बनाने का सामान (कीलें भरे विस्फोटक सहित) और डेटोनेटर के साथ गिरफ्तारियां हुईं.
टारगेटेड हमलों में बढ़ोतरी
4 जनवरी, 2026 (अमृतसर): AAP सरपंच जरमल सिंह (गांव वाल्टोहा, तरन तारन) की मैरीगोल्ड रिज़ॉर्ट (वेरका के पास, अमृतसर-अटारी रोड) में एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के दौरान, बहुत करीब से गोली मारकर हत्या कर दी गई. सूट पहने दो नकाबपोश हमलावरों ने उन पर गोलियां चलाईं. वह पहले भी जानलेवा हमलों से बच चुके थे और उन्हें विदेश में बैठे गैंगस्टर प्रभ दस्सुवाल से रंगदारी की धमकियां मिली थीं. एक मुख्य आरोपी (शूटर सुखराज सिंह उर्फ गूंगा, जिसका संबंध दस्सुवाल गिरोह से था) 14 जनवरी को पुलिस मुठभेड़ में मारा गया.
18 फरवरी, 2026 (तरन तारन): AAP सरपंच हरबिंदर सिंह की भी एक शादी समारोह (सिद्धू फार्म/शेरों गांव) में गोली मारकर हत्या कर दी गई. मोटरसाइकिल पर सवार तीन हमलावरों ने बेहद करीब से गोलियां चलाईं. इस घटना में एक रिश्तेदार घायल हो गया. कनाडा में बैठा गैंगस्टर लखबीर लांडा (जिसका नाम पहले हुए RPG हमलों से जुड़ा है) ने सोशल मीडिया के ज़रिए इस हत्या की ज़िम्मेदारी ली और इसके पीछे निजी रंजिश का हवाला दिया. मुख्य शूटर और एक अन्य आरोपी को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है.
फरवरी 28-1 मार्च 2026 (जालंधर): सरपंच मोहिंदर सिंह (बूटे दी छन्ना गांव) पर पांच हमलावरों (जिनके पास कृपाण और लोहे की रॉड थीं) ने बेरहमी से हमला किया. आरोप है कि ये हमलावर उन नशा तस्करों से जुड़े थे, जिनकी शिकायत सरपंच ने की थी. बाद में चोटों के कारण उनकी मृत्यु हो गई. परिवार ने उन्हें शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की.
BJP नेताओं पर भी हमले
7 अप्रैल, 2025 (जालंधर): वरिष्ठ BJP नेता मनोरंजन कालिया के घर पर ग्रेनेड फेंका गया. खिड़कियों के शीशे और गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं लेकिन कालिया सुरक्षित रहे. 2025 में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस ने इसे गैंगस्टर सिद्दीकी के साथियों से जुड़ी एक बड़ी साज़िश से जोड़ा.
1 अप्रैल, 2026 (चंडीगढ़): कम तीव्रता वाला धमाका पंजाब BJP मुख्यालय (सेक्टर 37) के बाहर हुआ. CCTV फुटेज में एक संदिग्ध को कोई चीज फेंकते हुए देखा गया. इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ. इससे सुरक्षा अलर्ट जारी हुआ और खुफिया तंत्र की चूक को लेकर आलोचना हुई.
अमृतसर में धार्मिक स्थल पर हमला (2025)
14-15 मार्च, 2025 ठाकुरद्वारा सनातन मंदिर पर ग्रेनेड हमला: देर रात मोटरसाइकिल पर सवार दो हमलावरों ने एक हैंड ग्रेनेड फेंका. इसमें दीवारों को नुकसान पहुंचा और खिड़कियां टूट गईं, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ. CCTV में यह घटना कैद हो गई. हालिया हमलों की इस कड़ी में किसी धार्मिक स्थल पर यह पहला हमला था. पंजाब पुलिस और NIA ने पाकिस्तान/ISI से जुड़े संबंधों की जांच की. NIA ने 2026 की शुरुआत में पूरे पंजाब में छापे मारे और इस मामले की जांच अपने हाथ में ले ली, जिससे विदेशी आकाओं और एक बड़े आतंकी नेटवर्क की ओर इशारा मिला.
ऑपरेशन सिंदूर और जासूसी नेटवर्क
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय एजेंसियों ने ISI समर्थित जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया. पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव और अन्य अधिकारियों ने बार-बार इसे पाकिस्तान की जवाबी रणनीति बताया है, जिसके तहत जासूसों का इस्तेमाल करके सीमावर्ती इलाकों में सेना की गतिविधियों, संवेदनशील ठिकानों और सैनिकों की तैनाती के बारे में रियल-टाइम खुफिया जानकारी जुटाई जाती है, ताकि भविष्य में हाइब्रिड हमले किए जा सकें या बदला लिया जा सके.
अब 2026 की बात करें, तो इस साल की शुरुआत में BSF ने सबसे पहले सुरक्षा एजेंसियों को इस बारे में आगाह किया था कि पंजाब में सुरक्षा ठिकानों की जासूसी के लिए चीन में बने सोलर-पावर्ड CCTV कैमरों का इस्तेमाल किया जा रहा है. पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) भारतीय सेना, BSF और रक्षा से जुड़े अन्य ठिकानों पर दूर से नज़र रखने के लिए, चीन में बने सस्ते सोलर-पावर्ड CCTV कैमरों का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल कर रही है. इन कैमरों में इनबिल्ट 4G/SIM कनेक्टिविटी की सुविधा भी है. ये डिवाइस सैनिकों की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स के रास्तों, छावनियों और संवेदनशील ठिकानों की लाइव वीडियो फुटेज सीधे मोबाइल ऐप्स के ज़रिए पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं तक भेजते हैं.
पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने हाल ही में ISI-समर्थित जासूसी के दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है.
जालंधर मॉड्यूल: इसमें पंजाब की काउंटर इंटेलिजेंस ने फ़िरोज़पुर से एक मुख्य ऑपरेटिव सुखविंदर सिंह उर्फ सुखा को गिरफ़्तार किया. उसके पास से चीन में बना एक सोलर-पावर्ड CCTV कैमरा, एक सोलर प्लेट और 4G कनेक्टिविटी वाले उपकरण बरामद किए गए.
कपूरथला मॉड्यूल (केंद्रीय एजेंसी के साथ संयुक्त अभियान): दो और लोगों को गिरफ़्तार किया गया. उनके पास से एक SIM-आधारित CCTV कैमरा, WiFi उपकरण और विदेशी हैंडलरों से जुड़े मोबाइल फ़ोन ज़ब्त किए गए.
ये मॉड्यूल सेना से जुड़ी जगहों पर नजर रखने और लाइव फुटेज भेजने के लिए रणनीतिक रूप से कैमरे लगा रहे थे. इसी तरह के मॉड्यूल का भंडाफोड़ गाजियाबाद और दिल्ली में भी किया गया था.