कृषि कानून को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच रेल मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पंजाब में माल गाड़ियों की एंट्री पर रोक लगा दी है. पंजाब सरकार केंद्र के इस फैसले से परेशान है. इसी बात को लेकर पंजाब के कांग्रेस सांसदों ने पहले रेल मंत्री से मिलने का समय मांगा जब वहां से ना हुई तो सांसदों ने पीएमओ का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने पंजाब में माल गाड़ियों को फिर से हरी झंडी दिखाने की मांग की है.
कांग्रेस के 7 सांसदों ने दिल्ली में सोमवार को बैठक की. एक दिन पहले ही पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा को चिट्ठी लिखकर पंजाब में माल गाड़ियों की रोक को लेकर चिंता जताई थी.
दरअसल, पंजाब कांग्रेस के सांसद रेल मंत्री से मिलने का वक्त 4 दिन से मांग रहे हैं. इस संदर्भ में लुधियाना के सांसद रमणीत बिट्टू ने कहा, "मैं गुरुवार को रेल मंत्रालय भी गया इसके बाद मैंने ई-मेल पर भी अर्जी भेजी लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है. इसलिए हमने पीएमओ का दरवाजा खटखटाया है, यह पंजाब की जनता के हित का विषय है और किसान पहले से ही बहुत परेशान है गाड़ी की फसल तैयार रखी है अगर बारिश हो गई तो और भारी समस्या खड़ी हो जाएगी.''
सरकार के फैसले को लेकर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि इससे ना सिर्फ पंजाब को आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि सेना के लिए लद्दाख और हिमाचल जाने वाले सप्लाई पर भी असर पड़ा है. ऐसे में यह राष्ट्र सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है.
आनंदपुर से कांग्रेस के सांसद और पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि हम लोगों ने प्रधानमंत्री से मिलने का वक्त मांगा है और उनसे मिलकर हम अपनी बात सामने रखेंगे, क्योंकि यह एक बेहद गंभीर मसला है और इस पर हम राजनीति नहीं करना चाहते.
बता दें कि चार नवंबर को पंजाब के तमाम विधायक कैप्टन के साथ दिल्ली का रुख करेंगे इस संदर्भ में वो राष्ट्रपति से भी समय मांग चुके हैं. कांग्रेस का आरोप है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय से आने वाले फंड को भी रोक दिया गया है जिससे राज्य के किसानों में असंतोष पैदा हो सकता है. सूबे के मुखिया कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सांसदों को रेल मंत्री और वित्त मंत्री से पंजाब की समस्याओं को लेकर मिलने का आदेश दिया था.