पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने अपने घर और पंजाब सचिवालय में अपने सरकारी दफ्तर के बाहर एक नोटिस चस्पा कर रखा है जिसमें है कि उनके पास मिलने के लिए आने वाले लोग उनके पैर छूकर न तो उन्हें और न ही खुद को शर्मिंदा करें. साथ में पैर छूने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.
तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा पंजाब के ऐसे अकेले मंत्री हैं जिन्होंने अपने घर और सरकारी दफ्तर के बाहर इस तरह का नोटिस लगा रखा है. कुछ दिनों पहले पंजाब के गुरदासपुर में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान जब पुलिस की वर्दी में एक ASI ने उनके पैर छू लिए थे तो उन्होंने पंजाब के डीजीपी को बोलकर उस ASI को सस्पेंड करवा दिया था.
तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा का कहना है कि वो कोई आध्यात्मिक गुरु या किसी डेरे के संचालक नहीं हैं कि जो लोग उनके पैर छुएं. साथ ही तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने कहा कि उन्हें पंजाब पुलिस की वर्दी में पुलिस वालों का राजनीतिज्ञों के पैर छूना तो बिल्कुल भी पसंद नहीं है क्योंकि इससे पुलिस की वर्दी की शान घटती है.
इस नोटिस पर अकाली दल ने पंजाब की कांग्रेस सरकार और कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा पर तीखा हमला बोला है. अकाली दल के प्रवक्ता मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि पहले कांग्रेस के मंत्री यह बताएं कि आखिरकार लोगों को अपना काम करवाने के लिए सरकार के मंत्रियों के पैर छूने की नौबत ही क्यों आई?
मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार में मंत्रियों के पैर छूने की प्रथा शुरू करने वाले भी कांग्रेस के ही लोग हैं. अब तृप्त राजेंद्र सिंह बाजवा ये सब कुछ करके एक अच्छी पहल तो कर रहे हैं लेकिन वो पहले ये बताएं कि आखिरकार ये पैर छूकर काम करवाने का कल्चर कांग्रेस की सरकार आते ही इतना क्यों बढ़ जाता है.
मंत्रियों, विधायकों और सांसदों के पैर छूकर अपना काम निकलवाना और खुशामदी करना कोई नई बात नहीं है. वहीं पंजाब के कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने अपने दफ्तर के बाहर पैर छूने की मनाही को लेकर नोटिस लगा कर एक नई पहल की शुरुआत तो की है. लेकिन विपक्ष का सवाल भी जायज है कि लोगों को अपने काम करवाने के लिए सरकार के मंत्रियों के पैरों में आखिरकार गिरना ही क्यूं पड़ता है?