बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दूसरे और आखिरी दिन बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को संगठन ने हरी झंडी दे दी है. जेपी नड्डा को दोबारा बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है. ये सिर्फ एक साल का कार्यकाल रहेगा. नड्डा को बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर एक साल इक्स्टेन्शन दिए जाने की पहले से ही तैयारी थी, सिर्फ औपचारिक घोषणा होना बाकी माना जा रहा है. ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि नड्डा को संगठन ने एक साल के लिए और जिम्मेदारी क्यों दी है?
इस बारे में बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह ने बैठक में साफ तौर पर जानकारी दी. अमित शाह ने कहा कि राजनाथ सिंह (पूर्व पार्टी अध्यक्ष और रक्षा मंत्री) ने नड्डा को लेकर प्रस्ताव रखा. बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकरिणी ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया और समर्थन दिया. अब नड्डाजी जून 2024 तक अध्यक्ष बने रहेंगे. हमारे पार्टी संविधान के हिसाब से संगठन का चुनाव होता है. हालांकि ये साल सदस्यता का है. कोविड के कारण समय पर सदस्यता का काम नहीं हो सका था, इसलिए संविधान के हिसाब से कार्य विस्तार किया गया है.
'नड्डा के नेतृत्व में यूपी में दोबारा जीतकर आए'
अमित शाह ने नड्डा के कार्यकाल में संगठन की सफलताओं को भी गिनाया. उन्होंने कहा- नड्डा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरान हमारा बिहार में सबसे ज्यादा स्ट्राइक रेट रहा. महाराष्ट्र में भी NDA ने बहुमत हासिल किया. यूपी में दोबारा जीतकर आए. बंगाल में हमारे विधायकों की संख्या बढ़ी. गुजरात में हमने प्रचंड जीत हासिल की. उत्तर पूर्व में भी शानदार काम किया. बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को आगे बढ़ाया. हर घर तिरंगा अभियान को भी सफल किया. मुझे विश्वास है कि मोदीजी के नेतृत्व में नड्डाजी के साथ 2019 से भी ज्यादा सीट हम जीत कर आएंगे.
इस साल 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव
यानी अब जेपी नड्डा का कार्यकाल अगले साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक बढ़ाए जाने का औपचारिक ऐलान कर दिया गया है. नड्डा का कार्यकाल 20 जनवरी को समाप्त हो रहा है. इस बीच, 2023 में 9 राज्यों में भी विधानसभा चुनाव होने हैं. इनमें नड्डा के अनुभव का संगठन को फायदा मिलने की उम्मीद है. बताते चलें कि इस साल जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, उनमें कर्नाटक, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा में बीजेपी की सरकार है. जबकि नागालैंड, मेघालय और मिजोरम की सत्ता पर क्षेत्रीय दल काबिज हैं, लेकिन बीजेपी सहयोगी दल के तौर पर है. वहीं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है. तेलंगाना में केसीआर की पार्टी बीआरएस की सरकार है.