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पश्चिम बंगाल में क्यों इस्तीफा दे रहे मेयर और पार्षद? सत्ता बदलते ही नगर पालिकाओं में भी बदहाल हुई TMC

पश्चिम बंगाल के नगर निकायों में तृणमूल कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। कोलकाता नगर निगम से लेकर भाटपाड़ा, हलिशहर और उत्तर दमदम तक राजनीतिक अस्थिरता, सामूहिक इस्तीफे और प्रशासनिक अव्यवस्था की स्थिति बन गई है।

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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की स्थिति नगर पालिकाओं में भी बदहाल होने लगी है
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की स्थिति नगर पालिकाओं में भी बदहाल होने लगी है

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन का असर अब नगर निकायों तक पहुंच गया है. राज्य में तृणमूल कांग्रेस की हालत नगरपालिकाओं में लगातार कमजोर होती दिख रही है और हालात ऐसे बनते जा रहे हैं कि आने वाले नगर निगम चुनाव से पहले ही कई नगर बोर्ड टूट सकते हैं. कोलकाता नगर निगम से लेकर भाटपाड़ा, हलिशहर और उत्तर दमदम तक राजनीतिक अस्थिरता, इस्तीफों और प्रशासनिक अव्यवस्था की तस्वीर सामने आ रही है. यहां तक कि कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम के इस्तीफे की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है, हालांकि इसे लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने हाल ही में कालीघाट स्थित अपने आवास पर पार्टी पार्षदों की बैठक बुलाई थी. बैठक में उन्होंने पार्षदों से अपील की कि कोई भी इस्तीफा न दे. इसके बावजूद हालात लगातार बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं. इस बीच दक्षिण दमदम से एक सनसनीखेज घटना भी सामने आई, जहां तृणमूल पार्षद संजय दास का शव फंदे से लटका मिला. संजय दास को तृणमूल के प्रभावशाली नेता देबराज चक्रवर्ती का करीबी माना जाता था. उन पर भ्रष्टाचार और वसूली जैसे आरोप भी लगते रहे थे. उनकी मौत ने राजनीतिक माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है.

ममता बनर्जी ने राज्यभर में पार्षदों को डराने-धमकाने और कथित रूप से गलत तरीके से गिरफ्तार किए जाने पर भी नाराजगी जताई है. कालीघाट की बैठक में उन्होंने कहा कि कई जगहों पर पार्षदों को भय दिखाया जा रहा है और 2021 की पुरानी घटनाओं को आधार बनाकर गिरफ्तारियां की जा रही हैं, जबकि उन मामलों में कोई अपराध तक नहीं हुआ था. दक्षिण दमदम के पार्षद की आत्महत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने पार्टी नेताओं और पार्षदों से सड़क पर उतरकर विरोध करने की अपील की.

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राज्य में सबसे बड़ा झटका हलिशहर नगरपालिका से लगा, जहां दो दिन पहले 16 पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा दे दिया. इससे पहले कांचरापाड़ा में भी सामूहिक इस्तीफे हो चुके हैं. हलिशहर नगरपालिका के चेयरमैन शुभंकर घोष ने भी पद छोड़ दिया है, जिससे वहां नगर सेवाओं को लेकर गंभीर संकट पैदा हो गया है.

भाटपाड़ा नगरपालिका की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है. यहां 35 में से 30 पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया. चेयरपर्सन रेबा साहा ने भी अपना पद छोड़ दिया है. इसके बाद नगर सेवाओं को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है. इलाके के बीजेपी विधायक अर्जुन सिंह का कहना है कि सरकारी अधिकारी जनता को सेवाएं देने का काम जारी रखेंगे.

भाटपाड़ा नगरपालिका के इस्तीफा देने वाले उप-नगर प्रमुख देवज्योति घोष ने कहा कि उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था. उनके मुताबिक, लगातार पार्षद और चेयरमैन इस्तीफा दे रहे थे, कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा था और पार्टी की ओर से कोई मार्गदर्शन नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह उनका निजी फैसला था और उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था.

उत्तर दमदम नगरपालिका में भी हालात खराब हैं. शुक्रवार को यहां अस्थायी कर्मचारियों ने नगरपालिका के गेट पर ताला लगाकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि चेयरमैन मौके पर आएं और उनकी समस्याओं का समाधान करें. कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें महीनों से नियमित वेतन नहीं मिल रहा और हर महीने अलग-अलग रकम दी जा रही है. स्थिति संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.

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कोलकाता नगर निगम में भी राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव खुलकर सामने आ गया है. शुक्रवार को ऐसी स्थिति बन गई कि मेयर फिरहाद हाकिम और अन्य तृणमूल पार्षदों को निगम भवन के बाहर ही बैठक करनी पड़ी. तृणमूल का आरोप है कि चेयरपर्सन के निर्देश के बावजूद बैठक कक्ष नहीं खोला गया. फिरहाद हाकिम ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान बताया. उन्होंने कहा कि हाउस को खोलना और बंद करना चेयरपर्सन का अधिकार है और जिस तरह की स्थिति बनाई गई, वह बेहद दुखद है. उन्होंने पार्षदों की तारीफ करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई जारी रहेगी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार से टकराव नहीं बल्कि मिलकर काम करना जरूरी है.

इन सबके बीच सबसे बड़ी चिंता आगामी मानसून को लेकर बढ़ गई है. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 10 से 16 जून के बीच बंगाल में मानसून प्रवेश कर सकता है. ऐसे समय में नगरपालिकाओं की बिगड़ती स्थिति और प्रशासनिक अव्यवस्था लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है. इसी साल दिसंबर तक राज्य में नगर निकाय चुनाव होने की संभावना है, लेकिन उससे पहले जिस तरह राजनीतिक और प्रशासनिक संकट बढ़ रहा है, उसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है.

राज्य के नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पाल ने हाल ही में विभागीय अधिकारियों, नगर आयुक्तों और अन्य नगरपालिका अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक के बाद उन्होंने कहा कि मानसून से पहले उनके पास केवल 18 दिन हैं और कोशिश होगी कि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो. उन्होंने कहा कि पिछले साल भारी बारिश हुई थी और इस बार भी ऐसी स्थिति से निपटने की तैयारी की जा रही है.

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