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यूपी: बसपा नेता सुखदेव राजभर का राजनीति से संन्यास, अखिलेश की तारीफ के क्या मायने?

चिट्ठी में सुखदेव राजभर ने भावुक अंदाज में कहा है कि वे अपने एक लौते पुत्र कमलाकांत राजभर को अखिलेश यादव को सौंप रहे हैं. उनकी तरफ से उनके बेटे का सपा में जाने का समर्थन किया गया है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • सुखदेव राजभर का राजनीति से संन्यास
  • अखिलेश की जमकर तारीफ की
  • मायावती के लिए खड़ी हुई चुनौती

उत्तर प्रदेश चुनाव में खुद को फिर सक्रिय करने में लगी बहुजन समाज पार्टी को लगातार बड़े सियासी झटके लग रहे हैं. अम्बेडकरनगर से लालजी वर्मा और रामअचल राजभर के पार्टी छोड़ने के बाद अब दिग्गज बसपा नेता सुखदेव राजभर ने राजनीति से संन्यास ले लिया है. उन्होंने बकायदा एक चिट्ठी लिख अपने इस फैसले की जानकारी दी है.

सुखदेव राजभर का राजनीति से संन्यास

सुखदेव ने बताया है कि वे पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रहे हैं. उनका स्वस्थ ना होना उन्हें सक्रिय राजनीति करने से रोक रहा है. वे अपने खराब स्वास्थ्य की वजह से दलितों और पिछड़ों की राजनीति भी नहीं कर पा रहे हैं. ऐसे में उन्होंने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग करने का फैसला लिया है. अब अगर सुखदेव का ये फैसला बसपा को झटका दे सकता है, तो वहीं दूसरी तरफ उनकी सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तारीफ करना कई सियासी समीकरण को बदलने वाला साबित हो रहा है.

अखिलेश की तारीफ में क्या कहा?

चिट्ठी में सुखदेव राजभर ने भावुक अंदाज में कहा है कि वे अपने एक लौते पुत्र कमलाकांत राजभर को अखिलेश यादव को सौंप रहे हैं. उनकी तरफ से उनके बेटे का सपा में जाने का समर्थन किया गया है. इसके अलावा सुखदेव ने यूपी के सियासी भविष्य पर भी बड़ी बात कह दी है. वे अखिलेश यादव को बतौर मुख्यमंत्री देख रहे हैं और जोर देकर कह रहे हैं कि उनके नेतृत्व में प्रदेश का भी भला होगा और उनका पुत्र भी समाज की लड़ाई को आगे बढ़ाने का काम करेगा.

मायावती अब क्या करेंगी?

बता दें कि सुखदेव राजभर आजमगढ़ के दीदारगंज से बसपा के विधायक हैं. दलित राजनीति में उन्हें एक बड़े चेहरे के तौर पर पहचान मिली है और उन्हीं की वजह से आजमगढ़ में बसपा की मजबूत उपस्थिति है. लेकिन अब उसी नेता ने ना सिर्फ राजनीति से संन्यास ले लिया है, बल्कि अपनी पार्टी बसपा को भटकी हुई बता दिया है. इसी वजह से चुनाव से ठीक पहले बसपा के फिर चुनावी समीकरण बिगड़ गए हैं. ब्राह्मणों को तो साधा जा रहा है, लेकिन उनका कोर वोट बैंक लगातार छिटक रहा है. ऐसे में अब आने वाले दिनों में बसपा प्रमुख मायावती अम्बेडकरनगर और आजमगढ़ के लिए क्या रणनीति बनाती हैं, इसका सभी को इंतजार रहेगा. 

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